Lok Sabha: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार का दिन भी लगातार विरोध और हंगामे के कारण सुचारु रूप से नहीं चल सका। लोकसभा में विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। लगातार नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच अंततः लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष ने कथित राम मंदिर दान अनियमितता और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब की मांग की। सदन के भीतर पूरे समय राजनीतिक तनाव का माहौल बना रहा।

वित्त मंत्री ने पेश किया संशोधन विधेयक
दोपहर दो बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 सदन में प्रस्तुत किया। यह विधेयक पहले जारी किए गए एक अध्यादेश का स्थान लेने के उद्देश्य से लाया गया है। प्रस्तावित संशोधन में सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश से संबंधित आयकर प्रावधानों में बदलाव का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2027 में भी आवश्यक संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य वित्तीय और कर संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।

विपक्ष ने चर्चा में भाग नहीं लिया
विधेयक पेश किए जाने के बाद विपक्ष के कुछ सदस्यों ने पहले इसके विरोध में नोटिस दिया था। हालांकि, जब अध्यक्ष की ओर से चर्चा के लिए उनके नाम पुकारे गए तो किसी भी सदस्य ने बहस में भाग नहीं लिया। इस दौरान सदन में लगातार नारेबाजी और विरोध जारी रहा। विपक्षी सदस्य अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे, जिससे विधायी चर्चा प्रभावित हुई। शोर-शराबे के बीच सदन की कार्यवाही सामान्य ढंग से आगे नहीं बढ़ सकी।
विनियोग (संख्या-3) विधेयक ध्वनिमत से पारित
लगातार विरोध के बावजूद लोकसभा ने विनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से उन अतिरिक्त व्ययों को मंजूरी देना है, जो 31 मार्च 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान स्वीकृत राशि से अधिक खर्च किए गए थे। यह प्रक्रिया सरकारी वित्तीय प्रबंधन और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप अतिरिक्त व्यय को विधिक स्वीकृति प्रदान करने के लिए आवश्यक मानी जाती है।
लोकसभा अध्यक्ष ने सदन चलाने की अपील की
कार्यवाही शुरू होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी सांसदों से प्रश्नकाल को व्यवस्थित ढंग से चलने देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां देशहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संसद नारेबाजी, पोस्टर या तख्तियां दिखाने का मंच नहीं है। अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में भी सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की थी, ताकि सदन की कार्यवाही बिना किसी व्यवधान के संचालित हो सके।

विपक्ष की मांगें और अब तक पारित विधेयक
विपक्षी सदस्य पूरे दिन सरकार से जवाब मांगते रहे और विशेष रूप से छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई तथा अन्य मुद्दों को लेकर नारेबाजी करते रहे। मानसून सत्र के दौरान अब तक लोकसभा पांच महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर चुकी है। इनमें पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल चुकी है। वहीं जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, विनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026 तथा सुप्रीम कोर्ट जज (संख्या) संशोधन विधेयक, 2026, जिसमें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव है, फिलहाल राज्यसभा में विचाराधीन हैं। मानसून सत्र के शेष दिनों में इन विधेयकों पर आगे की संसदीय प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है।
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