Parliament Deadlock: संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 15 दिनों से विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा है कि छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार सदन में जवाब दे। खरगे का आरोप था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया गया, जिसके कारण कई छात्र घायल हुए। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि इस पूरे मामले पर सरकार स्पष्ट बयान दे और जिम्मेदारी तय करे।

लाठीचार्ज के आदेश पर उठाए सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ ऐसे साधनों का इस्तेमाल किया गया, जिनकी आवश्यकता नहीं थी। उनके अनुसार पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग के तरीकों का उपयोग किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्र शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे और किसी सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा रहे थे, तब इतनी सख्त कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने पूछा कि आखिर छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया और क्या यह फैसला पुलिस अधिकारियों ने अपने स्तर पर लिया था या इसके पीछे किसी उच्च स्तर का निर्देश था।

पैलेट गन के इस्तेमाल का भी लगाया आरोप
खरगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए और विशेष रूप से छात्राओं के साथ भी कठोर व्यवहार किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जिन परिवारों और छात्रों को इस कार्रवाई के कारण पीड़ा झेलनी पड़ी है, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार इस मुद्दे को संसद में उठा रहा है, लेकिन सरकार जवाब देने से बच रही है।
गृह मंत्री और प्रधानमंत्री से जवाब की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष के सभी सांसद राज्यसभा के सभापति से मिले और उनसे आग्रह किया कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर इस मुद्दे पर बयान दें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। खरगे के अनुसार, केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि मामला समाप्त हो गया, बल्कि छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को आगे किया जा रहा है, जबकि विपक्ष सीधे गृह मंत्री का जवाब चाहता है।
सदन में विपक्ष को सम्मान नहीं मिलने का आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद की कार्यवाही को लेकर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब भी वह किसी नियम के तहत अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं, उन्हें पूरा अवसर नहीं दिया जाता। उनका कहना था कि नेता प्रतिपक्ष को भी वही सम्मान मिलना चाहिए, जो सदन के नेता को मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की बातों को बीच में रोका जाता है, जिससे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है।

राज्यसभा में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस
राज्यसभा में इस मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए गृह मंत्री से जवाब की मांग दोहराई। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के संसदीय वक्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सवाल पूछने और विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है।
वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष बिना किसी संसदीय नियम का हवाला दिए अपनी मांग रख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सरकार का अधिकार है कि सदन में किस मंत्री द्वारा जवाब दिया जाएगा। रिजिजू ने यह भी कहा कि सरकार सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर काम करती है और विपक्ष को संसदीय परंपराओं का पालन करना चाहिए। संसद में इस मुद्दे को लेकर गतिरोध फिलहाल जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
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