Social Media New Rules: केंद्र सरकार ने डिजिटल दुनिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़ा शिकंजा कस दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नए निर्देशों के तहत अब सोशल मीडिया कंपनियों को किसी भी आपत्तिजनक, गैर-कानूनी या संवेदनशील सामग्री की शिकायत मिलने के बाद केवल 3 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा।पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को शिकायत मिलने के बाद संबंधित सामग्री पर कार्रवाई करने के लिए 24 से 36 घंटे तक का समय मिलता था। लेकिन डिजिटल माध्यमों पर फर्जी और विवादित कंटेंट तेजी से फैलने को देखते हुए सरकार ने इस समयसीमा को काफी कम कर दिया है।

सरकार ने क्यों घटाई कंटेंट हटाने की समयसीमा
सरकार का कहना है कि आज के समय में सोशल मीडिया पर कोई भी वीडियो, तस्वीर या संदेश कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। खासकर डीपफेक वीडियो और एआई की मदद से तैयार की गई भ्रामक सामग्री समाज में गलत जानकारी फैलाने के साथ-साथ किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा सकती है।केंद्र सरकार के अनुसार, गलत सूचना और आपत्तिजनक सामग्री के तेजी से प्रसार को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है। नई 3 घंटे की समयसीमा का उद्देश्य ऐसी सामग्री को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है, जिससे सामाजिक सौहार्द, सार्वजनिक सुरक्षा और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा की जा सके।

डीपफेक और एआई कंटेंट पर होगी विशेष निगरानी
नए नियमों में डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार की गई सामग्री को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि तकनीक के गलत इस्तेमाल से फर्जी वीडियो, नकली आवाज और एडिट की गई तस्वीरें बड़ी चुनौती बन रही हैं।सोशल मीडिया कंपनियों को अब ऐसे मामलों में तेजी से जांच करनी होगी और शिकायत सही पाए जाने पर निर्धारित समय के भीतर कंटेंट हटाना अनिवार्य होगा।
किन-किन तरह की सामग्री पर होगी तुरंत कार्रवाई
नए नियमों के तहत कई प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री को हटाने की जिम्मेदारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की होगी। इसमें किसी व्यक्ति की छवि खराब करने वाले फर्जी वीडियो और एडिट की गई तस्वीरें शामिल हैं।इसके अलावा बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री यानी चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) पर भी सख्त कार्रवाई करनी होगी। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसी सामग्री को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
निजता उल्लंघन और भ्रामक खबरों पर भी शिकंजा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति किसी व्यक्ति की निजी जानकारी, अश्लील सामग्री या व्यक्तिगत तस्वीरें साझा करना भी कार्रवाई के दायरे में आएगा। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायत मिलने के बाद तेजी से कदम उठाना होगा।इसके अलावा ऐसी फर्जी खबरें, पोस्ट या वीडियो जो देश की संप्रभुता, सुरक्षा या कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं, उन्हें भी तुरंत हटाना जरूरी होगा।

नियम तोड़ने वाले प्लेटफॉर्म्स पर होगी कानूनी कार्रवाई
केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर वे तय 3 घंटे की समयसीमा में आपत्तिजनक सामग्री नहीं हटाती हैं तो उन्हें कानूनी नुकसान उठाना पड़ सकता है।नियमों का पालन नहीं करने वाले प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 79 के तहत मिलने वाले सेफ हार्बर संरक्षण से वंचित हो सकते हैं। इसका मतलब है कि ऐसी स्थिति में कंपनियों को केवल मध्यस्थ प्लेटफॉर्म नहीं माना जाएगा, बल्कि उन्हें सीधे कानूनी और आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम
सरकार का कहना है कि यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अधिक जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। नई व्यवस्था के जरिए फर्जी खबरों, साइबर अपराध और आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री के प्रसार को नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी।नए नियम लागू होने के बाद सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी और उन्हें शिकायतों पर पहले से कहीं ज्यादा तेजी से प्रतिक्रिया देनी होगी।











