Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में दो दिनों की लगातार तेजी के बाद शुक्रवार, 7 अगस्त को एक बार फिर गिरावट देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत होते ही सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए। शुरुआती कुछ मिनटों में ही सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग के मुकाबले करीब 503 अंक तक फिसल गया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।बाजार में आई इस गिरावट का सीधा असर बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। शुरुआती कारोबार में ही कंपनियों का मार्केट कैप करीब 1.57 लाख करोड़ रुपये कम हो गया।

सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर खुले
शुक्रवार को बीएसई का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स गिरावट के साथ 78,516.08 अंक पर खुला। कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद इसमें और कमजोरी आई और यह 78,451.99 के निचले स्तर तक पहुंच गया।वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,538.90 अंक पर खुला। इसके बाद निफ्टी में भी दबाव बढ़ा और यह पिछले बंद स्तर से करीब 107 अंक टूटकर 24,529.20 के निचले स्तर तक पहुंच गया।

बीएसई मार्केट कैप में 1.57 लाख करोड़ रुपये की कमी
गुरुवार, 6 अगस्त को बाजार बंद होने के समय बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4,94,94,539.903 करोड़ रुपये था। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में यह घटकर 4,93,36,740.32 करोड़ रुपये रह गया।इस तरह बाजार की गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में करीब 1,57,799.583 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर भारतीय बाजार पर दिखाई दे रहा है।
गुरुवार को बाजार में देखने को मिली थी तेजी
इससे पहले गुरुवार को शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला था। सेंसेक्स 373.76 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,954.76 अंक पर बंद हुआ था।वहीं, निफ्टी भी 11.35 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 24,636 अंक के स्तर पर बंद हुआ था। बाजार में आई इस तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रिलायंस इंडस्ट्रीज तथा आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में खरीदारी को प्रमुख कारण माना गया था।
स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी दिखा असर
गुरुवार के कारोबार में बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स में 0.89 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। वहीं, बीएसई मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स भी 0.14 प्रतिशत के फायदे में रहा था।हालांकि, शुक्रवार को बाजार में गिरावट लौटने से निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का असर व्यापक बाजार पर भी देखने को मिला।

डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ
शुक्रवार को भारतीय रुपया भी दबाव में नजर आया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे कमजोर होकर 95.28 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।इससे पहले गुरुवार को भी रुपया 14 पैसे गिरकर 95.22 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। डॉलर इंडेक्स में हल्की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी को रुपये में कमजोरी की वजह माना जा रहा है।
निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों पर
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर अब वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सत्रों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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