UPI News : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में MDR व्यवस्था लागू होती है तो इसका सीधा असर केवल व्यापारियों यानी मर्चेंट्स पर पड़ेगा। आम UPI यूजर्स से किसी भी तरह का शुल्क वसूलने की कोई योजना नहीं है।वित्त मंत्री ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और नई तकनीक पर निवेश करना पड़ता है। MDR से मिलने वाला सहयोग डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जिसका फायदा अंततः सभी UPI उपयोगकर्ताओं को मिलेगा।

UPI पर MDR लागू करने का अभी नहीं हुआ अंतिम फैसला
निर्मला सीतारमण ने बताया कि UPI पर MDR लागू करने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस विषय पर फैसला UPI और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा।उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती है, जब संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को मंजूरी मिलती है। इस प्रस्तावित विधेयक में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन करने की बात कही गई है।

कांग्रेस ने उठाए थे UPI शुल्क को लेकर सवाल
UPI पर MDR को लेकर राजनीतिक बहस तब तेज हुई जब कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि नया विधेयक UPI ट्रांजैक्शन को बिना शुल्क रखने वाली कानूनी व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।जयराम रमेश ने कहा था कि अगर यह बदलाव लागू होता है तो भविष्य में सभी तरह के UPI भुगतान पर MDR लगाने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने आशंका जताई थी कि इसका अंतिम बोझ आम ग्राहकों पर पड़ सकता है और लोगों को UPI इस्तेमाल करने के लिए शुल्क देना पड़ सकता है।
वित्त मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों को बताया भ्रामक
निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के इन दावों को गलत और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों पर संसद में तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, न कि ऐसी बातें फैलानी चाहिए जिनसे लोगों के बीच भ्रम पैदा हो।वित्त मंत्री ने दोहराया कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जिसके तहत आम UPI ग्राहकों से किसी भी प्रकार का चार्ज लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल भुगतान को आम लोगों के लिए आसान और सुलभ बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
RBI गवर्नर के बयान के बाद शुरू हुई थी बहस
UPI पर MDR लागू करने को लेकर चर्चा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान के बाद शुरू हुई थी। उन्होंने कहा था कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने में एक निश्चित लागत आती है और किसी न किसी माध्यम से इस लागत को पूरा करना पड़ता है।हालांकि, RBI गवर्नर ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि इस लागत का भार किस पर डाला जाएगा। उनके बयान के बाद डिजिटल भुगतान व्यवस्था की आर्थिक स्थिरता और MDR को लेकर बहस तेज हो गई थी।

सरकार का लक्ष्य डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना
भारत में UPI डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। करोड़ों लोग रोजाना छोटे-बड़े लेनदेन के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। सरकार लगातार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और इसे सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है।फिलहाल वित्त मंत्री के बयान से यह साफ हो गया है कि आम यूजर्स पर UPI शुल्क लगाने का कोई तत्काल फैसला नहीं हुआ है। आने वाले समय में MDR को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित समितियों की सिफारिश और संसद की प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा।
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