Kari Saeed Death: पड़ोसी देश पाकिस्तान में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक प्रमुख कमांडर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। मृतक की पहचान कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह लश्कर-ए-तैयबा के शोबा-ए-वारसा-ए-शोहदा विभाग में दक्षिण पंजाब का प्रमुख था। इस विभाग की जिम्मेदारी भारत में मारे गए संगठन से जुड़े आतंकियों के परिवारों को आर्थिक सहायता पहुंचाने की थी।

इस्लामाबाद की मस्जिद में पहुंचा था कारी सईद
घटना से जुड़ा एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें कारी सईद इस्लामाबाद स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी मस्जिद क़ूबा में पहुंचता दिखाई दे रहा है। फुटेज के अनुसार, वह अपने साथ एक बैग लेकर मस्जिद पहुंचा था। अंदर जाने के बाद उसने अपना बैग एक साथी को सौंप दिया और नमाज से पहले वुजू करने के लिए चला गया। इसके बाद वह दोबारा अपना बैग लेकर मस्जिद के मुख्य हिस्से की ओर बढ़ता नजर आता है।

चप्पल उतारते समय अचानक जमीन पर गिरा
सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देता है कि वुजू करने के बाद कारी सईद मस्जिद के मुख्य हॉल की ओर जाता है। सीढ़ियां चढ़ने के बाद वह नमाज के लिए बैठकर अपनी चप्पल उतारने की कोशिश करता है। इसी दौरान अचानक वह जमीन पर गिर जाता है। आसपास मौजूद लश्कर से जुड़े कुछ लोग तुरंत उसकी तरफ बढ़ते हैं और उसे उठाकर दूसरी जगह ले जाते हैं।
CPR देने के बाद भी नहीं बची जान
करीबी लोगों ने कारी सईद को होश में लाने की कोशिश की। रिपोर्ट के अनुसार, उसकी सांस नहीं चल रही थी, जिसके बाद उसे सीपीआर दिया गया। इसके बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। बाद में उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकी मौत की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
1990 से हाफिज सईद के संपर्क में होने का दावा
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज लंबे समय से लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद से जुड़ा हुआ था। दावा है कि वह वर्ष 1990 से संगठन के साथ काम कर रहा था और हाफिज सईद के करीबी कमांडरों में शामिल था। लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहने के कारण उसने अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं।

2017 तक आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रहा
रिपोर्ट के मुताबिक, कारी सईद वर्ष 2017 तक लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों में सक्रिय था। इस दौरान उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में संगठन के लिए लोगों की भर्ती करना शामिल बताया गया है। बाद में संगठन ने उसकी भूमिका बदलकर प्रशासनिक कार्यों से जोड़ दी। इसके बाद वह संगठन के आंतरिक प्रबंधन और उससे जुड़े परिवारों की सहायता जैसे कामों में शामिल रहा।
दक्षिण पंजाब में परिवारों तक पहुंचाता था आर्थिक मदद
बताया जाता है कि बाद में कारी सईद को लश्कर के शोबा-ए-वारसा-ए-शोहदा विभाग की जिम्मेदारी दी गई। इस विभाग के माध्यम से दक्षिण पंजाब के मुल्तान, बहावलपुर और डेरा गाजी खान जैसे क्षेत्रों से जुड़े उन आतंकियों के परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने का काम किया जाता था, जो भारत में मारे गए थे। इसके अलावा इन इलाकों से जुड़े संगठन के सदस्यों की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी भी उसके पास होने का दावा किया गया है।
मौत को लेकर कई सवाल अभी बरकरार
कारी सईद की अचानक हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए फुटेज में वह सामान्य रूप से मस्जिद में प्रवेश करता और नमाज की तैयारी करता दिखाई देता है, लेकिन कुछ ही देर बाद अचानक गिर जाता है। हालांकि, उसकी मौत के पीछे किसी साजिश, बीमारी या अन्य कारण की पुष्टि अभी नहीं हुई है। आधिकारिक जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
लंबे समय से लश्कर से जुड़ा था कारी सईद
कारी सईद का नाम लश्कर-ए-तैयबा से लंबे समय से जुड़े लोगों में बताया जाता रहा है। उसकी कथित भूमिका समय के साथ बदलती रही और सक्रिय आतंकी गतिविधियों से संगठनात्मक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक पहुंची। अब उसकी संदिग्ध मौत के बाद पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की गतिविधियों और उनके आंतरिक ढांचे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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