FCRA Bill JPC : विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA में प्रस्तावित संशोधन को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, FCRA संशोधन विधेयक को अब संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजा जाएगा। इससे पहले सरकार की योजना विधेयक को संसद में आगे बढ़ाने की थी, लेकिन विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों के विरोध के बीच इसे समिति के पास भेजने का निर्णय लिया गया है। इस कदम के बाद विधेयक पर व्यापक चर्चा और समीक्षा का रास्ता खुल गया है।

राज्यसभा की BAC बैठक में विपक्ष ने बिल वापस लेने की मांग की
FCRA विधेयक को लेकर राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी यानी BAC की बैठक में भी जमकर चर्चा हुई। बैठक के दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस यानी TMC ने सरकार से इस विधेयक को वापस लेने की मांग की। विपक्षी दलों का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का असर गैर-सरकारी संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक कल्याण से जुड़े संगठनों की गतिविधियों पर पड़ सकता है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है।

ईसाई समुदाय भी लगातार जता रहा है विरोध
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष के साथ-साथ ईसाई समुदाय से जुड़े संगठनों की ओर से भी विरोध दर्ज कराया जा रहा है। कई ईसाई संस्थाओं और चर्च संगठनों ने प्रस्तावित बदलावों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नए प्रावधानों से धार्मिक और सामाजिक सेवा से जुड़े संस्थानों के कामकाज पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ सकता है। इसी बीच तमिलनाडु विधानसभा ने भी विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इसे वापस लेने का आग्रह किया।
तमिलनाडु विधानसभा ने ध्वनि मत से प्रस्ताव किया पारित
तमिलनाडु विधानसभा में FCRA संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, प्रस्ताव में केंद्र सरकार से विधेयक को वापस लेने की अपील की गई। इसमें आशंका जताई गई कि प्रस्तावित संशोधन से परमार्थ संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक और समाज कल्याण संस्थानों के कामकाज पर इसके असर की बात कही गई। चर्चा के बाद विधानसभा ने प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया।
आइजोल में हजारों लोगों ने निकाली विरोध रैली
FCRA विधेयक के खिलाफ मिजोरम की राजधानी आइजोल में भी बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। अलग-अलग ईसाई समुदायों से जुड़े हजारों लोगों ने रैली निकालकर प्रस्तावित संशोधनों का विरोध किया। यह प्रदर्शन काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम यानी CCM के आह्वान पर आयोजित किया गया था। CCM मिजोरम के नौ प्रमुख चर्चों का समूह है, जिसमें प्रेस्बिटेरियन चर्च ऑफ इंडिया और बैपटिस्ट चर्च ऑफ मिजोरम सहित कई बड़े चर्च शामिल हैं।

नागालैंड के मुख्यमंत्री ने अमित शाह को लिखा पत्र
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने भी FCRA संशोधन को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपनी चिंता रखी है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रस्तावित बदलावों पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया। रियो ने आशंका जताई कि कानून में बदलाव से चर्चों और ईसाई धर्मार्थ संस्थाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। उनका कहना है कि इससे राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यक्रम प्रभावित होने की संभावना है।
संसदीय समिति से विस्तृत जांच की मांग
मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने FCRA में प्रस्तावित संशोधनों को संसदीय समिति के पास भेजने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विधेयक की पूरी तरह जांच की जानी चाहिए और इससे जुड़े सभी पक्षों को अपनी राय रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, संबंधित हितधारकों की चिंताओं को सुने बिना कानून में बड़े बदलाव करना उचित नहीं होगा। अब सरकार द्वारा बिल को JPC के पास भेजने के फैसले से इस मांग को बल मिला है।
जून में FCRA नियमों में किया गया था बदलाव
इस साल जून में केंद्र सरकार ने विदेशी धन प्राप्त करने से संबंधित FCRA नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत गैर-सरकारी संगठनों यानी NGOs के लिए पहले से निर्धारित उद्देश्यों और कार्यक्षेत्रों में से किसी एक का चयन करना अनिवार्य किया गया था। नए नियमों में धार्मिक आस्था से जुड़ी कुछ गतिविधियों को अनुमति दी गई है, लेकिन FCRA पंजीकरण के लिए पात्र कई श्रेणियों से धर्म-प्रचार को बाहर रखा गया है।
मार्च में लोकसभा में पेश हुआ था विधेयक
FCRA अमेंडमेंट बिल, 2026 को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार की योजना मौजूदा मानसून सत्र में विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ाने की थी। हालांकि, संसद में लगातार विपक्षी हंगामे और विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध के कारण विधायी कामकाज प्रभावित रहा है। ऐसे माहौल में सरकार ने फिलहाल विधेयक को आगे बढ़ाने की अपनी रणनीति में बदलाव किया है।
JPC के पास जाने से बढ़ेगी विस्तृत चर्चा की संभावना
अब FCRA संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजे जाने से इससे जुड़े प्रावधानों पर विस्तृत विचार-विमर्श की संभावना बढ़ गई है। समिति विभिन्न पक्षों की राय सुन सकती है और प्रस्तावित संशोधनों के प्रभाव का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट संसद को सौंप सकती है। सरकार का यह कदम विपक्ष और संबंधित समुदायों की चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, विधेयक का अंतिम स्वरूप और आगे की संसदीय प्रक्रिया समिति की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट होगी।
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