Bashar al-Assad Death Sentence: सीरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके भाई माहेर अल-असद को मानवता के खिलाफ अपराध तथा युद्ध अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों आरोपियों की गैरमौजूदगी में यह फैसला सुनाया। हालांकि, दोनों फिलहाल सीरिया से बाहर हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उन्हें कानून के कटघरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी माध्यमों के जरिए प्रयास जारी रहेंगे।

विद्रोही हमले के बाद रूस भागे थे दोनों भाई
बशर अल-असद और माहेर अल-असद दिसंबर 2024 में सीरिया छोड़कर रूस की राजधानी मॉस्को चले गए थे। उस समय विद्रोही समूहों ने बेहद तेजी से सैन्य अभियान चलाया था। करीब 11 दिनों तक चले इस अभियान के बाद असद परिवार का दशकों पुराना शासन समाप्त हो गया। 8 दिसंबर 2024 को बशर अल-असद की सत्ता औपचारिक रूप से खत्म हो गई थी और देश में सत्ता परिवर्तन का नया दौर शुरू हुआ।

हत्या और यातना समेत कई गंभीर आरोप
अदालत ने बशर अल-असद को कई गंभीर अपराधों का दोषी माना है। फैसले के अनुसार, उनके खिलाफ पूर्व नियोजित और जानबूझकर हत्या, बच्चों समेत लोगों को निशाना बनाना, यातना, मनमाने तरीके से गिरफ्तारी और मानवता के खिलाफ अपराध जैसे आरोप साबित हुए। अदालत ने इन अपराधों को असद शासन के दौरान नागरिकों के खिलाफ की गई कार्रवाई से जोड़ते हुए मौत की सजा सुनाई।
माहेर अल-असद पर भी गंभीर जिम्मेदारी
बशर के भाई माहेर अल-असद उस दौर में सीरियाई सेना की कुख्यात चौथी डिवीजन के कमांडर थे। उन्हें असद शासन के प्रमुख सुरक्षा अधिकारियों में गिना जाता था। अदालत ने उन्हें भी गंभीर अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया और मौत की सजा सुनाई। चौथी डिवीजन को असद शासन की सैन्य शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था और उस पर सरकार विरोधी गतिविधियों को दबाने में भूमिका निभाने के आरोप लगते रहे हैं।
2011 के विद्रोह को कुचलने पर उठे सवाल
सीरिया में वर्ष 2011 में राष्ट्रपति असद की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। सरकार ने इन प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सैन्य और सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया। असद सरकार पर प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार करने, यातना देने तथा उनकी हत्या करने के आरोप लगे। इसके बाद देश में संघर्ष बढ़ता गया और सीरिया लंबे गृहयुद्ध की चपेट में आ गया।

करीब 14 साल के युद्ध में भारी तबाही
सीरिया में करीब 14 वर्षों तक चले गृहयुद्ध ने देश को भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान पहुंचाया। संघर्ष के दौरान लगभग पांच लाख लोगों की मौत होने का अनुमान है। लाखों लोग विस्थापित हुए और बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर छोड़कर देश के दूसरे हिस्सों या विदेशों में शरण लेनी पड़ी। असद शासन के खिलाफ गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं।
असद के चचेरे भाई आतेफ नजीब को भी मौत
अदालत ने बशर अल-असद के चचेरे भाई और दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा विभाग के पूर्व प्रमुख आतेफ नजीब को भी मौत की सजा सुनाई। नजीब पर वर्ष 2011 में 15 बच्चों को कथित तौर पर यातना देने का आरोप था। इन बच्चों ने दीवार पर असद विरोधी नारे लिखे थे। इस घटना के बाद दक्षिणी सीरिया के दारा में बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हुआ, जो बाद में देश के अन्य हिस्सों तक फैल गया।
नजीब की सुनवाई सार्वजनिक चर्चा में रही
आतेफ नजीब की सुनवाई को सीरिया में संक्रमणकालीन न्याय की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण मामलों में शामिल किया गया है। अदालत की कार्यवाही के दौरान उसे जेल की वर्दी में एक पिंजरे के अंदर बैठा हुआ दिखाया गया। सीरियाई सरकार ने इस मुकदमे को पूर्व शासन के दौरान हुए अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
असद शासन खत्म होने के बाद भी हिंसा जारी
बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बावजूद सीरिया में हिंसा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। मार्च 2025 में असद समर्थक लड़ाकों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमलों के बाद जवाबी हिंसा हुई। इस दौरान करीब 1,500 नागरिकों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई, जिनमें बड़ी संख्या अलावी समुदाय के लोगों की बताई गई। असद स्वयं अलावी संप्रदाय से आते हैं, जिसे सीरिया का अल्पसंख्यक समुदाय माना जाता है।
सुवैदा में सांप्रदायिक संघर्ष ने बढ़ाई चिंता
जुलाई 2025 में द्रूज बहुल सुवैदा प्रांत में स्थानीय संघर्ष ने सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया। इस हिंसा में 1,700 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई। उत्तरी सीरिया में भी अलग-अलग इलाकों में छिटपुट हिंसा जारी रही। अलावी नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने सत्ता परिवर्तन के बाद देश में सांप्रदायिक तनाव को लेकर चिंता बढ़ाई है।
संक्रमणकालीन न्याय के लिए सरकार के प्रयास
सीरियाई अधिकारियों ने पूर्व असद शासन से जुड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी और संक्रमणकालीन न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए समितियों का गठन किया है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य पुराने अपराधों के लिए जवाबदेही तय करना, पीड़ितों को न्याय दिलाना और दशकों से चले आ रहे हिंसक संघर्ष तथा सांप्रदायिक विभाजन को समाप्त करना है।
2000 में राष्ट्रपति बने थे बशर अल-असद
बशर अल-असद ने वर्ष 2000 में महज 34 वर्ष की उम्र में सीरिया की सत्ता संभाली थी। उन्होंने अपने पिता हाफिज अल-असद से राष्ट्रपति पद की विरासत हासिल की। पेशे से नेत्र चिकित्सक रहे बशर ने लंदन में प्रशिक्षण लिया था। शुरुआती दौर में उन्हें सीरिया का अगला राष्ट्रपति नहीं माना जाता था, लेकिन बड़े भाई बासिल अल-असद की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद वह सत्ता के उत्तराधिकारी बन गए।
सुधारवादी छवि से कठोर शासक तक का सफर
सत्ता संभालने के शुरुआती वर्षों में बशर अल-असद को युवा और संभावित सुधारवादी नेता के रूप में पेश किया गया था। उनसे राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि, 2011 के विद्रोह के बाद सरकार की कठोर सैन्य कार्रवाई ने उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि को पूरी तरह बदल दिया। अब अदालत का फैसला उनके शासनकाल के दौरान कथित अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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