Ambikapur Farmers Satyagraha : अंबिकापुर में गुरुवार को किसानों का अनोखा और बेहद अलग विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। शहर के आवारा और बेसहारा मवेशियों से फसलों को हो रहे नुकसान से परेशान सरगुजा जिले के ग्रामीण किसानों ने प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए अनूठा रास्ता अपनाया। परसा और देवगढ़ गांव के किसान 50 से अधिक गाय, बैल और बछड़ों को करीब 13 किलोमीटर पैदल हांककर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंच गए। किसानों ने मवेशियों को प्रशासनिक कार्यालय के सामने खड़ा कर अपनी समस्या बताई।

कलेक्ट्रेट परिसर में मवेशियों के साथ धरने पर बैठे किसान
किसानों के इस प्रदर्शन से कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक अलग ही नजारा बन गया। बड़ी संख्या में मवेशी कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रवेश द्वार और कलेक्टर चैंबर के सामने बैठ गए। उनके साथ किसान भी वहीं धरने पर बैठ गए और प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग करने लगे। अचानक बड़ी संख्या में मवेशियों के पहुंचने से अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी हलचल मच गई।

सरपंचों के नेतृत्व में किसानों ने किया प्रदर्शन
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व ग्राम पंचायत परसा के सरपंच मनोज सिंह और देवगढ़ के सरपंच सन्यासी कुमार ने किया। किसानों का कहना है कि लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में शहर से लाए गए बेसहारा मवेशियों की समस्या बढ़ती जा रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने पर उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
नगर निगम पर मवेशी छोड़ने का गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी किसानों ने अंबिकापुर नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शहर में आवारा मवेशियों को रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण निगम कर्मचारी काऊ कैचर वाहनों से पशुओं को पकड़ते हैं और कथित तौर पर रात के समय उन्हें शहर से लगे ग्रामीण इलाकों में छोड़ देते हैं। किसानों के मुताबिक इससे ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।
परसा में 50 एकड़ फसल तबाह होने का दावा
परसा गांव के किसानों का दावा है कि शहर से लाकर छोड़े गए मवेशियों ने करीब 50 एकड़ क्षेत्र में लगी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने जब इन मवेशियों के बारे में जानकारी जुटाई, तो पता चला कि इनमें से अधिकांश स्थानीय पशुपालकों के नहीं हैं। किसानों का आरोप है कि बाहर से छोड़े गए मवेशियों के कारण उनकी मेहनत और खेती की लागत दोनों प्रभावित हो रही हैं।

कई गांवों में फैल चुकी है मवेशियों की समस्या
किसानों के मुताबिक समस्या केवल परसा और देवगढ़ तक सीमित नहीं है। अंबिकापुर से लगे रजपुरी, करमहा, हसूली, भकुरा, नवापारा, खैरबार, श्रीगढ़ और नवागढ़ समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेसहारा मवेशियों की संख्या बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि खुले में घूमने वाले पशु खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सड़कों पर मवेशियों से दुर्घटना का खतरा
ग्रामीणों ने फसल नुकसान के साथ-साथ सड़क सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा बना रहता है। अचानक सड़क पर आने वाले पशुओं के कारण वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। किसानों ने प्रशासन से इस समस्या को गंभीरता से लेने की मांग की है।
कांजी हाउस की क्षमता पर भी सवाल
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि अंबिकापुर नगर निगम का कांजी हाउस पर्याप्त क्षमता वाला नहीं है। वहां बड़ी संख्या में बेसहारा मवेशियों को रखने की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा सीतापुर के सोनतराई में स्वीकृत गोधाम का संचालन अब तक शुरू नहीं होने की बात भी किसानों ने कही। पुराने गौठानों के बंद होने से समस्या और गंभीर हो गई है।
किसानों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख मांगें स्पष्ट रखीं। उन्होंने बेसहारा मवेशियों के लिए स्थायी गोधाम या पर्याप्त क्षमता वाले कांजी हाउस की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की। साथ ही फसलों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने और मवेशियों को खुले में छोड़ने वाले लापरवाह पशुपालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
समाधान नहीं हुआ तो जारी रहेगा मवेशी सत्याग्रह
किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी समस्या का ठोस समाधान नहीं किया गया, तो उनका विरोध और तेज हो सकता है। किसानों का कहना है कि जरूरत पड़ी तो वे रोजाना मवेशियों को हांककर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचाएंगे। उनका उद्देश्य प्रशासन को यह बताना है कि बेसहारा मवेशियों की समस्या अब खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।
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