Trump Tariff News : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले ड्रोन और उनके कलपुर्जों पर अमेरिका की निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने विदेशों से आयात होने वाले कुछ ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू ड्रोन उद्योग को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।

एडवांस ड्रोन पर लगेगा सबसे ज्यादा टैरिफ
व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 25 किलोग्राम से अधिक वजन वाले या थर्मल इमेजिंग जैसी उन्नत तकनीक से लैस संवेदनशील ड्रोन पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाएगा। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा की उच्च श्रेणी में नहीं आने वाले छोटे ड्रोन पर 25 प्रतिशत का शुल्क लागू होगा। नए टैरिफ का उद्देश्य विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटाकर अमेरिकी उत्पादन को बढ़ावा देना है।

चीन क्यों बना ट्रंप के निशाने पर?
हालांकि नए टैरिफ कई देशों से अमेरिका आने वाले ड्रोन पर लागू होंगे, लेकिन इस फैसले का सबसे बड़ा असर चीन पर पड़ने की संभावना है। चीन लंबे समय से वैश्विक ड्रोन उद्योग में मजबूत स्थिति रखता है। कम कीमत और उन्नत तकनीक के कारण चीनी कंपनियों के ड्रोन अमेरिका समेत दुनियाभर के बाजारों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं।
अमेरिका में 80 फीसदी ड्रोन चीन से आते हैं
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी कमर्शियल ड्रोन बाजार में करीब 80 प्रतिशत ड्रोन चीन से आयात किए जाते हैं। इनका इस्तेमाल हॉलीवुड प्रोडक्शन, कंटेंट क्रिएशन, रियल एस्टेट, कृषि और कई अन्य क्षेत्रों में किया जाता है। चीनी कंपनी DJI की वैश्विक कमर्शियल ड्रोन मार्केट में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी बताई जाती है। ऐसे में अमेरिका का नया शुल्क चीनी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
घरेलू ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देने की कोशिश
व्हाइट हाउस के मुताबिक, नए टैरिफ का एक प्रमुख उद्देश्य अमेरिका में ड्रोन और उनके पार्ट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है। प्रशासन विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना चाहता है, खासकर उन तकनीकों में जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। ज्यादातर नए शुल्क 3 सितंबर से लागू होने की बात कही गई है।

चीन ने भी अमेरिका के खिलाफ उठाया कदम
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से पहले अमेरिका और चीन के बीच ड्रोन व्यापार को लेकर तनाव बढ़ चुका था। पिछले सप्ताह चीन ने जबरन मजदूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए अमेरिकी ड्रोन निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। इसके साथ ही चीन ने छह अमेरिकी कंपनियों को भी ब्लैकलिस्ट किया था। यह कदम अमेरिका द्वारा चीन समेत कई देशों पर नए व्यापार शुल्क लगाए जाने के बाद आया।
भारतीय ड्रोन कंपनियों पर भी पड़ेगा असर
ट्रंप के नए फैसले का असर भारत के ड्रोन निर्यातकों पर भी पड़ सकता है। भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में छोटे और कम संवेदनशील कमर्शियल ड्रोन के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, चीन पर भारी शुल्क भारतीय ड्रोन कंपनियों के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
भारत के लिए अमेरिकी बाजार में बढ़ सकता है मौका
अगर अमेरिकी बाजार में चीनी ड्रोन की हिस्सेदारी घटती है, तो भारतीय कंपनियों को अपनी जगह बनाने का अवसर मिल सकता है। ideaForge, DroneAcharya और Garuda Aerospace जैसी कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें कीमत, तकनीक, सुरक्षा मानकों और अमेरिकी नियमों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने होंगे।
चीन की बादशाहत को चुनौती देने की तैयारी
ट्रंप प्रशासन का यह कदम केवल टैरिफ नीति नहीं, बल्कि ड्रोन तकनीक में चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में अमेरिका घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ मित्र देशों से ड्रोन सप्लाई बढ़ाने पर भी जोर दे सकता है। ऐसे में भारत समेत अन्य देशों की कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में नए कारोबारी अवसर खुल सकते हैं।
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