CWC Meeting : कांग्रेस कार्य समिति यानी CWC की अहम बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। खरगे ने मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस की चिंताओं को सामने रखा।
नोटबंदी के बाद ‘वोटबंदी’ का खरगे ने लगाया आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि करीब एक दशक पहले लागू नोटबंदी से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई और अब कथित तौर पर ‘वोटबंदी’ के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस के सामने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बड़ी जिम्मेदारी है। ये कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी साधा निशाना
खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है। खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग रखी। कांग्रेस अध्यक्ष के ये बयान पार्टी की राजनीतिक मांगों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उसके रुख को दर्शाते हैं।
चुनाव आयुक्तों की असहमति का किया जिक्र
CWC बैठक में खरगे ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने अन्य चुनाव आयुक्तों की ओर से SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ मुद्दों पर जताई गई आपत्तियों का हवाला दिया। कांग्रेस ने Form-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनावी डेटा से जुड़े विषयों पर पारदर्शिता की मांग की है।
चुनाव आयोग ने दावों पर रखा अपना पक्ष
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने फैसलों और SIR प्रक्रिया को कानूनी व्यवस्था के तहत बताया है। आयोग की ओर से कहा गया है कि संस्थागत स्तर पर विचारों में अंतर होना प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR से जुड़े फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
युवाओं के वोट को लेकर कांग्रेस की चिंता
खरगे ने युवा मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मतदान की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे युवाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ी। कांग्रेस का आरोप है कि Form-6 से जुड़े बदलाव नए मतदाताओं के पंजीकरण को प्रभावित कर सकते हैं। पार्टी ने खासतौर पर युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को लेकर चिंता जताई है।
राहुल गांधी के उठाए मुद्दों का हवाला
कांग्रेस अध्यक्ष ने राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे मामलों का जिक्र किया, जहां कांग्रेस ने डुप्लीकेट मतदाताओं और संदिग्ध पतों से संबंधित सवाल उठाए थे। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी ने इन मुद्दों को दस्तावेजों के आधार पर सामने रखा।
कांग्रेस ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
बैठक में कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर पांच प्रमुख मांगें रखीं। पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची में बड़े बदलावों से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं, उन्हें इसकी जानकारी देकर अपील का अवसर मिलना चाहिए। इसके अलावा राजनीतिक दलों को जरूरी डेटा समय पर सरल और उपयोगी प्रारूप में उपलब्ध कराने की मांग की गई।
स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता पर जोर
कांग्रेस ने उन मामलों में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है, जहां मतदाता सूची में गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आते हैं। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में अधिकतम पारदर्शिता की भी मांग रखी। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को समझने और उनकी समीक्षा करने का अवसर मिले।
आगामी चुनावों के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच CWC की यह बैठक महत्वपूर्ण रही। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह मतदाता अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर उठाती रहेगी। वहीं चुनाव आयोग SIR को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता और संस्थागत भूमिका से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रह सकते हैं।
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