कावेरी जल विवाद के बीच कर्नाटक और तमिलनाडु की सियासत में फिर हलचल तेज हो गई है। डीके शिवकुमार और तमिलनाडु CM विजय के बीच बढ़ती तल्खी ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों राज्यों के बीच एक और मुद्दे पर टकराव शुरू हो गया?
कावेरी जल विवाद के बीच कर्नाटक और तमिलनाडु की सियासत में फिर हलचल तेज हो गई है। डीके शिवकुमार और तमिलनाडु CM विजय के बीच बढ़ती तल्खी ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों राज्यों के बीच एक और मुद्दे पर टकराव शुरू हो गया?

Cauvery Dispute : तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से चला आ रहा कावेरी जल विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि एक नई घटना ने दोनों राज्यों के बीच तनाव बढ़ा दिया है। कर्नाटक के कावेरी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में कथित शिकारियों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच हुई मुठभेड़ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। घटना के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कर्नाटक सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।


तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने रविवार 16 अगस्त को इस घटना पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की। मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह घटना बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के चामराजनगर जिले के हनूर तालुक के गांवों में रहने वाले तमिल समुदाय के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या की गई।

सीएम विजय के मुताबिक, एंथनी सामी, जॉन रोज पीटर और कुमार की 15 अगस्त की सुबह कावेरी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में कर्नाटक वन विभाग के अधिकारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि वन विभाग की ओर से दी गई सफाई स्वीकार करने योग्य नहीं है। विजय ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री विजय ने कर्नाटक सरकार से मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि घटना के वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने मृतकों के परिवारों को हर संभव सहायता देने की अपील की। विजय ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कर्नाटक सरकार को मजबूत और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी घटना को लेकर अपना पक्ष रखा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी सुबह मिली थी। वन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें मौके की स्थिति के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि संबंधित वनकर्मियों की बंदूकें जब्त कर ली गई हैं। इसके अलावा जंगली जानवरों के मांस से भरे दो बैग बरामद होने की जानकारी भी सामने आई है। घटना के दौरान एक व्यक्ति के मौके से भागने की बात कही गई है।

डीके शिवकुमार ने कहा कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को अधिकारी जुटा रहे हैं। उनके अनुसार, जंगल में मौजूद लोगों ने कथित तौर पर वनकर्मियों पर गोली चलाई थी। इसी वजह से उन्होंने मामले में मजिस्ट्रेट स्तर की न्यायिक जांच कराने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मृतकों के परिवारों को कितना और किस प्रकार का मुआवजा दिया जाएगा, इसका फैसला रिपोर्ट सामने आने के बाद किया जाएगा।
कावेरी जल विवाद दक्षिण भारत के सबसे पुराने अंतरराज्यीय जल विवादों में शामिल है। करीब 150 साल से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर मतभेद चले आ रहे हैं। खासतौर पर कम बारिश और कमजोर मानसून के दौरान दोनों राज्यों के बीच विवाद और अधिक गंभीर हो जाता है। सिंचाई के साथ-साथ पेयजल की जरूरतों को लेकर भी दोनों राज्य अपने-अपने हिस्से के पानी की मांग करते हैं।
कावेरी जल विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने कावेरी नदी के पानी को लेकर राज्यों के बीच बंटवारे की व्यवस्था तय की और कर्नाटक को निर्धारित मात्रा में पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया। इसके बाद भी समय-समय पर दोनों राज्यों में पानी छोड़ने और रोकने को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में वन्यजीव अभयारण्य की ताजा घटना ने दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है।


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