Abhijeet Dipke Swades: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की है। शनिवार को उन्होंने अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से इस अभियान की शुरुआत की। दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और निजी स्कूलों की बढ़ती फीस आम परिवारों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने अभियान के जरिए जमीनी स्तर पर जानकारी जुटाने का फैसला किया है।
सरकारी स्कूलों की सुविधाओं पर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों में मौजूद बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के 80 साल बाद भी अगर किसी सरकारी स्कूल में पीने के पानी जैसी आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके मुताबिक, कई स्कूलों में खिड़कियां खराब हैं और विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त बेंच तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे हालात में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है।
‘स्वदेस’ फिल्म से मिली गांव के लिए काम करने की प्रेरणा
दीपके ने अपने अभियान के पीछे की प्रेरणा के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि बॉलीवुड फिल्म ‘स्वदेस’ का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। फिल्म में शाहरुख खान द्वारा निभाए गए मोहन भार्गव के किरदार ने उन्हें अपने गांव और समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। दीपके के अनुसार, फिल्म देखने के दौरान उनके मन में भी यह विचार आया कि अपने गांव की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए काम किया जाना चाहिए।
मोहन भार्गव के किरदार ने छोड़ी गहरी छाप
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए बताया कि वह बचपन से ‘स्वदेस’ देखते आए हैं। फिल्म का एक विशेष दृश्य उन्हें हर बार भावुक कर देता है। कहानी में मोहन भार्गव अपने गांव चरणपुर लौटता है और वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं को करीब से समझता है। इसी दौरान वह हरिदास की आर्थिक परेशानियों को देखता है, जो अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए संघर्ष कर रहा होता है।
स्टेशन पर पानी बेचते बच्चे का दृश्य याद रहा
दीपके ने फिल्म के उस दृश्य का भी जिक्र किया, जिसमें मोहन ट्रेन से लौटते समय एक बच्चे को स्कूल जाने के बजाय स्टेशन पर पानी बेचते हुए देखता है। उनके मुताबिक, यह दृश्य उनके मन पर गहरी छाप छोड़ गया। उन्होंने कहा कि जिस तरह फिल्म में मोहन की आंखों में आंसू आ जाते हैं, उसी तरह वह भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो जाते हैं। यही भावना धीरे-धीरे उनके भीतर अपने गांव के लिए कुछ करने की इच्छा में बदल गई।
‘स्वदेस’ को 100 से ज्यादा बार देखने का दावा
अभिजीत दीपके ने बताया कि उन्होंने ‘स्वदेस’ फिल्म को अब तक 100 से ज्यादा बार देखा है। उन्होंने फिल्म के संवादों और कहानी का जिक्र करते हुए कहा कि यह फिल्म उनके लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि उनके सोचने के तरीके को प्रभावित करने वाली कहानी बनी। उनके अनुसार, फिल्म ने उन्हें समाज और गांव की समस्याओं को करीब से देखने तथा उनके समाधान के लिए प्रयास करने की प्रेरणा दी।
सरकारी स्कूलों का डेटा जुटाएगी CJP
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत CJP ने सरकारी स्कूलों की स्थिति का व्यवस्थित तरीके से आकलन करने की योजना बनाई है। दीपके ने बताया कि संगठन ने इसके लिए एक चेकलिस्ट तैयार की है। इस चेकलिस्ट के जरिए स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय, बेंच, खिड़कियों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। इसका उद्देश्य स्कूलों की वास्तविक स्थिति का जमीनी आंकड़ा तैयार करना है।
पहले महाराष्ट्र, फिर देशभर में अभियान
दीपके के मुताबिक, अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र से की जा रही है। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद सरकारी स्कूलों से भी जानकारी जुटाने की योजना है। एकत्र किए गए आंकड़ों को व्यवस्थित करके यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि किन स्कूलों में कौन-कौन सी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं और कहां सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत है। इसके आधार पर सरकारी स्कूलों की समस्याओं को व्यापक स्तर पर उठाने की कोशिश की जाएगी।
निजी स्कूलों की फीस भी बड़ा मुद्दा
अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की समस्याओं के साथ निजी स्कूलों की बढ़ती फीस को भी अभियान से जोड़कर देखा है। उनका कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होतीं, तो अभिभावकों के सामने निजी स्कूलों का विकल्प बचता है। लेकिन लगातार बढ़ती फीस के कारण सामान्य और मध्यम आय वाले परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाना शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
गांव से शुरू हुआ अभियान बड़े मुद्दे की ओर बढ़ा
अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से शुरू किया गया ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अब सरकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक मुद्दों को सामने लाने की कोशिश कर रहा है। दीपके ने ‘स्वदेस’ से मिली प्रेरणा को जमीनी अभियान का रूप देने की बात कही है। CJP की चेकलिस्ट के जरिए स्कूलों की वास्तविक स्थिति का आंकड़ा जुटाने और उसे सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाने की योजना है। अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
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