Tejashwi Yadav: पटना में पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की एक टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई। राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए दशरथ मांझी की जगह गलती से जीतन राम मांझी का नाम ले लिया। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने जब उन्हें टोका तो उन्होंने तुरंत अपनी गलती सुधार ली।
दशरथ मांझी की जगह लिया जीतन राम मांझी का नाम
दरअसल, सोमवार को पटना स्थित आरजेडी के राज्य कार्यालय में दशरथ मांझी की पुण्यतिथि के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें तेजस्वी यादव समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। संबोधन के दौरान तेजस्वी ने कहा कि वह “जीतन राम मांझी के श्रद्धांजलि समारोह” में मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे हैं। यह सुनते ही वहां मौजूद लोगों ने उन्हें गलती का एहसास कराया। इसके बाद उन्होंने तुरंत अपने बयान को सुधारते हुए दशरथ मांझी का नाम लिया।
गलती पर जीतन राम मांझी ने साधा निशाना
तेजस्वी यादव की इस चूक की जानकारी जैसे ही पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को मिली, उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। मांझी ने अपने अंदाज में तेजस्वी यादव पर तंज कसा और उनकी टिप्पणी को लेकर निशाना साधा। उन्होंने शराब के नशे से जुड़ी एक चर्चित कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा कि नशा किसी से कुछ भी करवा सकता है।
मांझी बोले- लगता है बाबू साहब का रात वाला नशा नहीं उतरा
जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “नशा शराब में होती तो नाचती बोतल।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लगता है बाबू साहब का रात वाला नशा अभी उतरा नहीं था, इसलिए उन्हें जीवित रहते ही श्रद्धांजलि दी जा रही है। मांझी का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
लालू-राबड़ी को लेकर भी किया कटाक्ष
जीतन राम मांझी यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में तेजस्वी यादव जीते-जी अपने पिता लालू प्रसाद यादव और मां राबड़ी देवी को भी श्रद्धांजलि दे सकते हैं। अपने बयान के अंत में उन्होंने फिर कहा कि नशा इंसान से कुछ भी करवा सकता है। मांझी के इस तंज को तेजस्वी यादव की राजनीतिक चूक पर सीधा हमला माना जा रहा है।
सियासत में छोटी गलती भी बन जाती है बड़ा मुद्दा
राजनीतिक मंच पर नेताओं की जुबान फिसलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन विरोधी दल के नेता इसे अक्सर राजनीतिक मुद्दा बना देते हैं। तेजस्वी यादव ने मौके पर ही अपनी गलती सुधार ली थी, लेकिन जीतन राम मांझी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। बिहार की राजनीति में दोनों नेताओं के बीच पहले भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिलती रही है।
झारखंड छात्र आंदोलन पर भी घिरे थे तेजस्वी
यह पहली बार नहीं है जब तेजस्वी यादव का कोई बयान या प्रतिक्रिया चर्चा में आई हो। इससे करीब दो सप्ताह पहले 6 अगस्त को झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने विस्तृत प्रतिक्रिया देने के बजाय कहा था कि इस मुद्दे पर बाद में बात करेंगे। उस समय झारखंड में छात्र आंदोलन अपने चरम पर था और राज्य की महागठबंधन सरकार में आरजेडी भी महत्वपूर्ण सहयोगी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार के मुद्दों पर रहा फोकस
झारखंड के छात्र आंदोलन से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया नहीं देने के बाद तेजस्वी यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से बिहार की कानून-व्यवस्था और बंटी यादव हत्याकांड से जुड़े मुद्दों पर बात की थी। उनके इस रुख को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई थी। हालांकि, अब झारखंड में छात्रों का आंदोलन खत्म हो चुका है और राज्य सरकार ने उनकी अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया है।
झारखंड में बातचीत के बाद खत्म हुआ आंदोलन
झारखंड में छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई। इसके बाद देर रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने छात्रों की अधिकांश मांगों को स्वीकार करने की घोषणा की। इसके साथ ही आंदोलन समाप्त हो गया। ऐसे में झारखंड का मुद्दा फिलहाल शांत होता दिखाई दे रहा है, लेकिन बिहार में तेजस्वी यादव और जीतन राम मांझी के बीच ताजा बयानबाजी ने राजनीतिक तापमान जरूर बढ़ा दिया है।
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