Parliamentary Committee Reshuffle : देश की संसद की महत्वपूर्ण स्थायी समितियों का वर्ष 2026 के लिए पुनर्गठन कर दिया गया है। लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, कुल 24 संसदीय स्थायी समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों के नाम घोषित किए गए हैं। नया ढांचा 26 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। पुनर्गठन के बाद अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों से जुड़े संसदीय कामकाज की निगरानी के लिए समितियों में नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
शशि थरूर फिर बने विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष
पुनर्गठित समितियों में कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर को एक बार फिर विदेश मामलों की समिति की अध्यक्षता सौंपी गई है। वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे सूचना एवं प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। दोनों समितियां अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों की नीतियों, कामकाज और विभिन्न विषयों पर संसदीय स्तर पर विचार-विमर्श करती हैं।
वाणिज्य समिति में हुआ बड़ा बदलाव
वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष पद पर इस बार महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन की जगह भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को समिति का नया अध्यक्ष बनाया गया है। यह बदलाव पुनर्गठन की प्रमुख नियुक्तियों में शामिल है। समिति देश के व्यापार, वाणिज्य और उससे संबंधित नीतिगत विषयों पर संसदीय समीक्षा का काम करती है।
गृह, वित्त और रक्षा समितियों की जिम्मेदारी तय
गृह मामलों की स्थायी समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल को दी गई है। वहीं, वित्त संबंधी समिति की कमान भर्तृहरि महताब को और रक्षा संबंधी समिति का अध्यक्ष राधा मोहन सिंह को बनाया गया है। इन समितियों के जरिए संबंधित मंत्रालयों के कामकाज और नीतिगत विषयों पर सांसद चर्चा करते हैं तथा विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करते हैं।
अनुराग ठाकुर और राजीव प्रताप रूडी को भी अहम जिम्मेदारी
पुनर्गठन में भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर को कोयला, खान और इस्पात संबंधी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। राजीव प्रताप रूडी को जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, कांग्रेस के मुकुल वासनिक को शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से संबंधित समिति की अध्यक्षता सौंपी गई है। इन समितियों के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों की नीतियों और सरकारी योजनाओं की संसदीय समीक्षा की जाती है।
चरणजीत सिंह चन्नी को कृषि समिति की कमान
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी को कृषि संबंधी स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा, डीएमके की सांसद कनिमोझी को उपभोक्ता मामलों से संबंधित समिति की अध्यक्षता की जिम्मेदारी दी गई है। पुनर्गठन के बाद विभिन्न दलों के सांसदों को अलग-अलग समितियों में प्रतिनिधित्व दिया गया है।
हर स्थायी समिति में होते हैं 31 सदस्य
संसदीय परंपरा के अनुसार, प्रत्येक विभाग-संबंधित स्थायी समिति में कुल 31 सदस्य होते हैं। इनमें 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से लिए जाते हैं। समितियों का उद्देश्य संसद के सदनों के नियमित कामकाज के अलावा मंत्रालयों और विभागों से जुड़े विषयों की विस्तार से समीक्षा करना है। समितियां विधेयकों, नीतियों, बजट और संबंधित विषयों पर विचार कर सकती हैं।
राहुल गांधी रक्षा समिति में शामिल
पुनर्गठित समितियों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को रक्षा मामलों की स्थायी समिति का सदस्य बनाया गया है। इसका मतलब है कि वह समिति की बैठकों और उससे संबंधित संसदीय विचार-विमर्श में हिस्सा लेंगे। रक्षा मंत्रालय से जुड़े विभिन्न विषयों पर समिति के स्तर पर चर्चा और समीक्षा की जाती है।
प्रियंका गांधी गृह समिति की सदस्य
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को गृह मामलों की स्थायी समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इस समिति में केंद्रीय गृह मंत्रालय से संबंधित नीतियों, प्रशासनिक विषयों और विभिन्न मुद्दों पर संसदीय समीक्षा की जाती है। नए पुनर्गठन के साथ अलग-अलग दलों के सांसदों की भूमिकाएं और समितियों में जिम्मेदारियां तय हो गई हैं।
26 सितंबर से लागू माना जाएगा नया ढांचा
लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, पुनर्गठित संसदीय स्थायी समितियों का नया ढांचा 26 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति के बाद अब समितियों का नियमित कामकाज आगे बढ़ेगा। इन समितियों की रिपोर्ट और सिफारिशें संसद के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और संबंधित मंत्रालयों की नीतियों तथा योजनाओं की समीक्षा का संसदीय मंच उपलब्ध कराती हैं।
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