UAE Iran Tension : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के संबंधों में भी अचानक तनाव बढ़ गया है। यूएई की ओर से आरोप लगाया गया है कि ईरान ने उसकी दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस कथित मिसाइल हमले के बाद अबू धाबी ने तेहरान के खिलाफ कड़ा आर्थिक कदम उठाया है। यूएई ने ईरान के साथ सभी कारोबारी, वाणिज्यिक और वित्तीय गतिविधियों को अगले आदेश तक रोकने की घोषणा की है।
UAE ने ईरान के साथ सभी लेन-देन रोके
यूएई के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता अफ्रा अल हामेली ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में मौजूदा तनाव और सुरक्षा स्थिति को देखते हुए ईरान के साथ सभी कारोबारी, वाणिज्यिक और वित्तीय लेन-देन पर अगले आदेश तक रोक लगाई जा रही है। इस फैसले को यूएई की ओर से ईरान के खिलाफ अब तक उठाए गए महत्वपूर्ण आर्थिक कदमों में से एक माना जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध प्रभावित होने की आशंका है।
ईरान ने मिसाइल हमले के आरोपों को किया खारिज
दूसरी तरफ ईरान ने यूएई के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने यूएई की ओर मिसाइलें दागे जाने के दावे को गलत बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप दोनों देशों के बीच अच्छे पड़ोसी संबंधों की भावना के अनुरूप नहीं हैं। बाघेई के मुताबिक, ऐसे आरोप आपसी विश्वास बहाली के प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने का काम कर सकते हैं।
मिसाइल गिरने के बाद UAE में मचा हड़कंप
कथित मिसाइल खतरे की जानकारी सामने आने के बाद यूएई के कई हिस्सों में लोगों के बीच चिंता फैल गई। दुबई और शारजाह समेत कुछ इलाकों में लोगों के मोबाइल फोन पर आपातकालीन अलर्ट भेजे गए। नागरिकों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। अचानक जारी हुए अलर्ट के कारण लोगों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।
एक मिसाइल क्षेत्रीय जलसीमा के बाहर गिरी
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कथित मिसाइल हमले को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की। मंत्रालय के अनुसार, पहली मिसाइल देश की क्षेत्रीय जलसीमा के बाहर जाकर गिरी। वहीं दूसरी मिसाइल यूएई की क्षेत्रीय जलसीमा के भीतर पहुंची। इस घटनाक्रम के बाद यूएई ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि देश की वायु रक्षा प्रणालियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं।
दुबई और शारजाह में लोगों को मिला इमरजेंसी अलर्ट
मिसाइल खतरे का पता लगने के बाद यूएई प्रशासन ने तत्काल नागरिकों को चेतावनी जारी की। दुबई और शारजाह के कई हिस्सों में आपातकालीन अलर्ट की आवाजें सुनाई दीं। गृह मंत्रालय ने लोगों से अपील की कि वे नजदीकी सुरक्षित इमारत में शरण लें और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें। अधिकारियों ने नागरिकों को केवल सरकारी और आधिकारिक माध्यमों से मिलने वाली सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी।
कुछ देर बाद सामान्य स्थिति का संदेश जारी
आपातकालीन चेतावनी जारी होने के कुछ समय बाद यूएई अधिकारियों की ओर से दूसरा संदेश साझा किया गया। इसमें बताया गया कि स्थिति अब सुरक्षित है और नागरिक अपनी सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू कर सकते हैं। इससे लोगों को कुछ राहत मिली। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरे को देखते हुए सतर्क बनी रहीं। अधिकारियों ने नागरिकों से भविष्य में भी आपातकालीन निर्देशों का पालन करने को कहा।
कई महीनों में सबसे अहम मिसाइल चेतावनियों में शामिल
मंगलवार को जारी किया गया यह अलर्ट पिछले कई महीनों के दौरान यूएई में सामने आई महत्वपूर्ण मिसाइल चेतावनियों में से एक माना जा रहा है। आम तौर पर यूएई को क्षेत्र के अपेक्षाकृत स्थिर और सुरक्षित देशों में गिना जाता है, लेकिन मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब खाड़ी क्षेत्र तक भी दिखाई दे रहा है। मिसाइल चेतावनी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
आर्थिक कदम से बढ़ सकता है क्षेत्रीय दबाव
ईरान के साथ सभी कारोबारी और वित्तीय लेन-देन रोकने का यूएई का फैसला केवल सुरक्षा प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण आर्थिक कदम भी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और वित्तीय गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, ईरान द्वारा हमले के आरोपों से इनकार किए जाने के कारण घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट विरोधाभास है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
मध्य पूर्व की स्थिति पर दुनिया की नजर
ईरान और यूएई के बीच बढ़ता विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पूरे मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। कथित मिसाइल हमले और उसके बाद लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर दोनों देशों के अगले कदमों पर है। यदि तनाव बढ़ता है, तो इसका असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
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