Vande Mataram Row: वंदे मातरम को लेकर देश में जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC ने एक अहम प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव के मुताबिक कांग्रेस के आधिकारिक कार्यक्रमों और पार्टी मंचों पर वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम उसके लिए बेहद भावनात्मक और ऐतिहासिक विषय है, जबकि भारतीय जनता पार्टी इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर पेश कर रही है। कांग्रेस ने अपने फैसले को 1937 में लिए गए निर्णय से जोड़ते हुए अपना रुख स्पष्ट किया है।
कांग्रेस ने 1937 के फैसले को बताया आधार
कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम को लेकर 1937 में कांग्रेस अधिवेशन में एक स्पष्ट निर्णय लिया गया था। पार्टी के मुताबिक उस समय रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह को ध्यान में रखते हुए गीत के शुरुआती दो छंदों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था। कांग्रेस का तर्क है कि वह उसी ऐतिहासिक निर्णय का पालन कर रही है। पार्टी ने हाल में बनाए गए कानून को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और कहा है कि इस मुद्दे पर उसके रुख में किसी तरह का भ्रम नहीं है।
जयराम रमेश ने कांग्रेस का रुख साफ किया
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 1937 के अधिवेशन में वंदे मातरम के दो छंदों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था और यह निर्णय रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के आधार पर लिया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार की भ्रम या विवाद की स्थिति नहीं है। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि 1950 में संविधान सभा की बैठक के दौरान इसी व्यवस्था को दोहराया गया था। कांग्रेस इसी ऐतिहासिक संदर्भ के आधार पर अपना फैसला सही ठहरा रही है।
बीजेपी ने कांग्रेस के फैसले की निंदा की
कांग्रेस के प्रस्ताव पर बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया है। बीजेपी ने इसे संविधान और राष्ट्रभावना का अपमान बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जिस मुद्दे को पहले व्यक्तिगत घटना बताकर टालने की कोशिश की थी, अब उसी को अपनी आधिकारिक नीति का हिस्सा बना दिया है। बीजेपी का कहना है कि वंदे मातरम स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से गहराई से जुड़ा गीत है, इसलिए इसके साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।
नितिन नबीन ने कांग्रेस पर साधा निशाना
नितिन नबीन ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति ने अब अपने कथित अपमान को प्रस्ताव का रूप दे दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मंचों पर वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद गाने का फैसला पार्टी की सोच को दर्शाता है। उनके मुताबिक कुछ दिन पहले इसी तरह की घटना सामने आने पर कांग्रेस ने उसे महज संयोग बताकर नजरअंदाज किया था, लेकिन अब वही बात पार्टी की नीति बन गई है। उन्होंने कांग्रेस के रुख को राष्ट्र के सम्मान से जोड़ते हुए इसकी कड़ी आलोचना की।
बलिदानियों का अपमान बताया
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि वंदे मातरम भारत माता की वंदना का प्रतीक है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हजारों लोगों ने इसे अपनी प्रेरणा माना था। उनके मुताबिक इस गीत को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद उन बलिदानियों की भावनाओं का अपमान है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित किया। नितिन नबीन ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने राष्ट्र के स्वाभिमान से समझौता किया है।
कांग्रेस को नई मुस्लिम लीग बताया
नितिन नबीन ने कांग्रेस पर सबसे बड़ा राजनीतिक हमला करते हुए उसे आज की नई मुस्लिम लीग करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के दबाव में राष्ट्रीय मुद्दों पर अपना रुख बदल रही है। बीजेपी नेता के इस बयान से वंदे मातरम विवाद और ज्यादा राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है। कांग्रेस की ओर से इस बयान पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी राजनीतिक गलियारों की नजर बनी हुई है।
सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस पर हमला बोला
बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस के फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस खुद को देश और संविधान से ऊपर मान रही है। उनका कहना था कि पार्टी अपने प्रस्ताव को संविधान में बने कानून से भी ऊपर रखने की कोशिश कर रही है। सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि कांग्रेस के इस फैसले से उन अटकलों को भी बल मिला है, जिनमें उसे आज की नई मुस्लिम लीग कहा जा रहा है।
1937 के संदर्भ पर बीजेपी का पलटवार
सुधांशु त्रिवेदी ने वंदे मातरम को लेकर 1937 के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय मुस्लिम लीग की ओर से वंदे मातरम को लेकर जिस तरह की आपत्ति और जिद सामने आई थी, आज कांग्रेस का रुख भी वैसा ही दिखाई दे रहा है। बीजेपी नेताओं के बयानों से साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर भी बहस का केंद्र बना रह सकता है।
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