Trump Iran Warning : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव को और तेज करने का ऐलान किया है। ट्रंप के मुताबिक अमेरिका अब ऐसा बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और उसके अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संपर्कों को सीमित करना है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करता है या किसी भी तरह की आर्थिक मदद उपलब्ध कराता है, उसे भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस रणनीति के जरिए अमेरिका ईरान पर सैन्य दबाव के साथ आर्थिक मोर्चे पर भी शिकंजा कसना चाहता है।
युद्ध के बीच आर्थिक युद्ध की रणनीति
ट्रंप का नया रुख ऐसे समय सामने आया है जब ईरान के साथ संघर्ष को शुरू हुए लगभग छह महीने होने वाले हैं। अभी तक युद्ध खत्म करने के लिए किसी ठोस कूटनीतिक बातचीत की दिशा स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है। दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई से भी स्थायी समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा। ऐसे हालात में ट्रंप प्रशासन ईरान की सैन्य क्षमता के बजाय उसकी आर्थिक ताकत को कमजोर करने पर ज्यादा जोर देता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी रणनीति का लक्ष्य ईरान की आय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख रास्तों को बाधित करना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बढ़ी चिंता
ईरान से जुड़े संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। तेल कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी काफी हद तक बंद रहने की स्थिति में है। इस मार्ग में किसी भी तरह की लंबे समय तक बाधा का असर कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक बाजारों के साथ-साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। युद्ध की लागत और ऊर्जा संबंधी अनिश्चितता ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
अमेरिका में भी बढ़ रहा राजनीतिक दबाव
अमेरिका में नवंबर में होने वाले अंतरिम चुनाव करीब आते जा रहे हैं। ऐसे में लंबे समय से जारी युद्ध और उस पर होने वाले भारी खर्च को लेकर ट्रंप प्रशासन को घरेलू स्तर पर भी सवालों का सामना करना पड़ सकता है। युद्ध की बढ़ती लागत का असर अमेरिकी नागरिकों की जेब पर पड़ने की बात सामने आ रही है। इसके अलावा अमेरिकी सेना पर भी लगातार संसाधनों और सैन्य तैनाती का दबाव बढ़ रहा है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर संघर्ष की दिशा बदलने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप ने दी अब तक की बड़ी आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान के खिलाफ नई कार्रवाई को लेकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने इसे अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई बताते हुए व्यापक आर्थिक दबाव और अलग-थलग करने की रणनीति की बात कही। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई कर सकता है। हालांकि उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले देशों को किस प्रकार की आर्थिक सजा दी जाएगी।
ईरान की मदद करने वालों को भी चेतावनी
ट्रंप ने कहा कि यदि कोई देश अपने वित्तीय संस्थानों, कारोबारी प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों या सरकारी संस्थाओं के माध्यम से ईरान को किसी भी तरह की सहायता देता है, तो उसे भी बड़े आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी घोषणा में किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तावित अभियान का दायरा केवल ईरान तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि उसके साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
तेल तस्करी और वित्तीय नेटवर्क पर निशाना
ट्रंप ने उन गतिविधियों की सूची भी बताई, जिन्हें अमेरिका रोकना चाहता है। इसमें तेल की तस्करी, धन के लेन-देन की व्यवस्थाएं, नकद धन का स्थानांतरण, मुद्रा विनिमय से जुड़ी कंपनियां, जहाजों का पंजीकरण और वास्तविक कारोबार को छिपाने के लिए बनाई गई कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका का उद्देश्य ऐसे नेटवर्क को कमजोर करना है, जिनके जरिए ईरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में आर्थिक गतिविधियां जारी रख पा रहा है। इस तरह आर्थिक प्रतिबंधों का दायरा और व्यापक होने की संभावना है।
अमेरिकी वित्त मंत्री भी दे चुके हैं संकेत
इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी संकेत दिया था कि अमेरिका ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से अलग करने की कोशिश तेज करेगा। उनके मुताबिक यह अभियान अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। अमेरिकी वित्त विभाग पहले से ही ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों और वित्तीय कार्रवाई को आगे बढ़ा रहा है। ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव और अधिक सख्त किया जा सकता है।
ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी से बढ़ेगा दबाव
अमेरिकी वित्त विभाग कई महीनों से ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ नामक अभियान के तहत ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर कार्रवाई कर रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य प्रतिबंधों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाले धन और आर्थिक सहायता के रास्तों को बाधित करना है। ट्रंप की नई घोषणा इसी रणनीति को और व्यापक रूप देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। अब निगाह इस बात पर है कि अमेरिका किन देशों और संस्थाओं पर कार्रवाई करता है और इसका वैश्विक तेल बाजार पर कितना असर पड़ता है।
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