Raksha Bandhan 2026 : रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आपसी रिश्ते को मजबूत करने वाला प्रमुख हिंदू त्योहार है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी सुरक्षा, सुख व खुशहाली का संकल्प लेते हैं। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। हालांकि, इस बार त्योहार की तारीख को लेकर लोगों के बीच खास चर्चा है, क्योंकि इसी दिन साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है।
रक्षाबंधन के दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण
वर्ष 2026 में कुल चार ग्रहण पड़ने की जानकारी दी गई है, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। इनमें से पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लग चुका है। अब साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को पड़ेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा और इसकी तारीख रक्षाबंधन के साथ पड़ने के कारण धार्मिक दृष्टि से इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
पांच घंटे से ज्यादा लंबा होगा ग्रहण
जानकारी के अनुसार, 28 अगस्त को लगने वाले चंद्र ग्रहण की कुल अवधि करीब 5 घंटे 38 मिनट बताई जा रही है। इस दौरान चंद्रमा का लगभग 96.2 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया में आ सकता है। हालांकि, इस पूरी अवधि में चंद्रमा आंशिक रूप से ग्रहणग्रस्त नहीं रहेगा। वैज्ञानिक गणना के अनुसार, आंशिक ग्रहण का चरण करीब 3 घंटे 18 मिनट तक रहने की संभावना है।
सुबह 6:53 बजे शुरू होगा ग्रहण
भारतीय समय के अनुसार, चंद्र ग्रहण की शुरुआत करीब सुबह 6:53 बजे होने और इसका समापन लगभग दोपहर 12:31 बजे होने की जानकारी दी गई है। ग्रहण की वास्तविक दृश्यता स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए स्थानीय स्तर पर खगोलीय गणना और पंचांग की जानकारी को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
भारत में नहीं दिखाई देगा चंद्र ग्रहण
28 अगस्त का यह चंद्र ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देने वाला है। बताया गया है कि इसे उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप के कुछ हिस्सों समेत दुनिया के अन्य क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां इससे जुड़े कई पारंपरिक धार्मिक नियम लागू नहीं माने जाएंगे।
भारत में सूतक काल होगा या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल सामान्यतः उसी स्थान पर माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा, ऐसी धार्मिक मान्यता है। इसी कारण मंदिरों के कपाट बंद करने या सामान्य पूजा-पाठ रोकने की आवश्यकता नहीं मानी जाएगी।
क्या रक्षाबंधन पर बांध सकेंगे राखी?
चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण रक्षाबंधन के त्योहार पर इसका कोई विशेष धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं माना जाएगा। भाई-बहन सामान्य रूप से राखी का पर्व मना सकते हैं और बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि, राखी बांधने के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय देखना बेहतर रहेगा।
रक्षाबंधन 2026 पर राखी बांधने के शुभ मुहूर्त
28 अगस्त को राखी बांधने के लिए दिए गए शुभ समय में सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय शामिल है। इसके अलावा सुबह 7:33 बजे से 9:10 बजे तक और सुबह 9:10 बजे से 10:46 बजे तक के समय भी शुभ बताए गए हैं। भाई की कलाई पर राखी बांधते समय बहनें पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई रख सकती हैं।
ग्रहण और त्योहार को लेकर न हों परेशान
इस बार रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण की तारीख एक होने के बावजूद भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी बांधने पर रोक नहीं होगी। भाई-बहन श्रद्धा और प्रेम के साथ त्योहार मना सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और स्थानीय पंचांग में मुहूर्त में अंतर संभव है, इसलिए अंतिम निर्णय के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा। धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।
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