Bhojshala Namaz Tension: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर धार स्थित भोजशाला में शुक्रवार को जुमे की नमाज और हिंदू संगठनों के विरोध के चलते तनावपूर्ण माहौल बन गया। मुस्लिम समुदाय ने न्यायालय की अंतरिम व्यवस्था के तहत भोजशाला से सटे खसरा नंबर 612 में नमाज अदा की, जबकि हिंदू संगठनों ने इसके विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ और महाआरती की। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया।
खसरा नंबर 612 में नमाज को लेकर हिंदू संगठनों की आपत्ति
मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम व्यवस्था के तहत निर्धारित स्थान पर जुमे की नमाज के लिए पहुंचे। वहीं, हिंदू संगठनों और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई। हिंदू पक्ष का कहना है कि खसरा नंबर 612 भोजशाला के बेहद करीब है और संरक्षित क्षेत्र की सीमा के भीतर धार्मिक गतिविधि से परिसर की धार्मिक प्रकृति प्रभावित हो सकती है।
हनुमान चालीसा और महाआरती से दर्ज कराया विरोध
नमाज के दौरान हिंदू संगठनों से जुड़े लोग भोजशाला परिसर और उसके आसपास एकत्र हुए। श्रद्धालुओं ने शंखनाद किया और ‘जय श्री राम’ तथा ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाए। इसके बाद सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ और महाआरती की गई। हिंदू पक्ष ने इसे शांतिपूर्ण विरोध बताते हुए कहा कि वह भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर मानता है और इसके आसपास नमाज की व्यवस्था का विरोध करता रहेगा।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदली स्थिति
भोजशाला विवाद में 15 मई 2026 का मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला को मूल रूप से हिंदू मंदिर से जुड़ा स्थल बताया था। कोर्ट ने वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा जारी उस व्यवस्था को निरस्त कर दिया था, जिसमें हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज की अनुमति थी। इसके बाद मुख्य परिसर में नमाज पर रोक की स्थिति बनी।
सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम व्यवस्था
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने मामले में अंतरिम व्यवस्था के तहत मुख्य भोजशाला भवन के बाहर और उसके समीप खसरा नंबर 612 पर नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। यह व्यवस्था अंतिम फैसला नहीं है। मुस्लिम समुदाय का कहना है कि वह अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर शांतिपूर्ण तरीके से नमाज अदा कर रहा है।
सुरक्षा के लिए बनाया गया त्रिस्तरीय घेरा
शुक्रवार को दोनों समुदायों की गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। धार के कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने मौके पर रहकर हालात की निगरानी की। दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग रास्ते तय किए गए, ताकि आमने-सामने की स्थिति उत्पन्न न हो। पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती भी की।
एक हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
धार के अलावा आसपास के जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष सशस्त्र बल की टुकड़ियां भी बुलाए जाने की जानकारी दी गई। भोजशाला और खसरा नंबर 612 जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई। प्रशासन ने ड्रोन के जरिए भी इलाके की गतिविधियों पर नजर रखी, ताकि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी पुलिस की नजर
तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए पुलिस के साइबर सेल ने सोशल मीडिया पर भी निगरानी बढ़ा दी। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों और भड़काऊ सामग्री पर भरोसा नहीं करने की अपील की। एसपी सचिन शर्मा ने कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन कराया जा रहा है और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य दोनों समुदायों की गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना है।
हिंदू संगठनों ने रखी तीन प्रमुख मांगें
हिंदू संगठनों और राजपूत समाज ने प्रशासन को ज्ञापन देकर कई मांगें रखीं। इनमें भोजशाला के चारों ओर 100 मीटर के संरक्षित क्षेत्र का सीमांकन, संरक्षित क्षेत्र में कथित अतिक्रमण हटाना और खसरा नंबर 612 से नमाज की व्यवस्था को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना शामिल है। संगठनों का कहना है कि इससे विवाद और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां कम हो सकती हैं।
अंतिम न्यायिक फैसले पर टिकी नजर
भोजशाला विवाद फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। एक तरफ हिंदू संगठन हाई कोर्ट के फैसले को अपने पक्ष में महत्वपूर्ण मान रहे हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम व्यवस्था के तहत नमाज अदा कर रहा है। प्रशासन की सतर्कता के कारण फिलहाल धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुईं। हालांकि, दोनों पक्षों की अलग-अलग मांगों के बीच अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक धार में हर शुक्रवार सुरक्षा व्यवस्था चुनौती बनी रह सकती है।
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