J&K Special Status: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे की बहाली को लेकर अपनी पार्टी का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे से जुड़े प्रावधानों को हटाए जाने के बावजूद उनकी पार्टी इस मुद्दे से पीछे नहीं हटेगी। अब्दुल्ला ने कहा कि विशेष दर्जे की बहाली नेशनल कॉन्फ्रेंस के राजनीतिक एजेंडे में सबसे ऊपर है और पार्टी इसके लिए अपना संघर्ष लगातार जारी रखेगी।
विशेष संवैधानिक संबंध को बताया महत्वपूर्ण
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष संवैधानिक दर्जा भारत संघ के साथ उसके विशिष्ट और अलग संवैधानिक संबंध को दर्शाता था। उनके मुताबिक, यह व्यवस्था केवल संवैधानिक प्रावधान नहीं थी, बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पहचान और नेशनल कॉन्फ्रेंस की विचारधारा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस विरासत को आगे भी राजनीतिक रूप से उठाती रहेगी।
एकतरफा बदलाव पर उठाए सवाल
पार्टी प्रमुख ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों में भले ही केंद्र सरकार ने बदलाव कर दिया हो, लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस इन प्रावधानों की बहाली की मांग को नहीं छोड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बदलावों को एकतरफा तरीके से लागू किया गया। अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने रुख को जनता के सामने रखती रहेगी।
लोगों के संवैधानिक अधिकारों की बात
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए आवाज उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने विशेष दर्जे की बहाली को पार्टी के राजनीतिक एजेंडे का प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि इस मांग को लेकर संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उनका बयान ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बनी हुई है।
कुलगाम आतंकी हमले की निष्पक्ष जांच की मांग
इससे पहले कुलगाम में हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की मौत को लेकर भी फारूक अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को बेहद दुखद बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। अब्दुल्ला ने कहा कि यह स्पष्ट होना जरूरी है कि हमला किसने किया और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। उनके मुताबिक, जांच के जरिए घटना की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
हमले की परिस्थितियों पर भी सवाल
उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अब्दुल्ला ने कहा कि अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि मजदूरों की हत्या किस तरह और किन लोगों ने की। उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच एजेंसियों को सभी पहलुओं की जांच करनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों को सामने लाना जरूरी है।
राज्य का दर्जा मांगने के समय घटनाओं पर सवाल
फारूक अब्दुल्ला ने घाटी में होने वाली आतंकी घटनाओं के समय को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब भी उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाती है, उसी दौरान इस तरह की घटनाएं क्यों सामने आती हैं, यह समझना मुश्किल है। हालांकि, उन्होंने इस सवाल के पीछे किसी निश्चित व्यक्ति या संगठन को जिम्मेदार नहीं ठहराया, बल्कि निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मुद्दा बरकरार
फारूक अब्दुल्ला के ताजा बयान से साफ है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस विशेष दर्जे की बहाली और राज्य का दर्जा वापस पाने की मांग को आगे भी राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाती रहेगी। पार्टी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। वहीं, घाटी में हाल की आतंकी घटनाओं ने सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर बहस फिर तेज कर दी है।
राजनीतिक संघर्ष के साथ सुरक्षा पर भी जोर
नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष ने एक तरफ संवैधानिक अधिकारों की बहाली की मांग दोहराई, तो दूसरी तरफ आतंकी हमले की निष्पक्ष जांच की जरूरत भी बताई। उनके बयानों से संकेत मिलता है कि पार्टी जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ सुरक्षा से जुड़े सवालों को भी प्रमुखता से उठाना चाहती है। आने वाले समय में विशेष दर्जा, राज्य का दर्जा और आतंकवाद जैसे मुद्दे जम्मू-कश्मीर की राजनीति में महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं।
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