Akhilesh Yadav on Farmers: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मेरठ में किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट को लेकर प्रदेश सरकार और पुलिस पर निशाना साधा है। शुक्रवार को उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल किसान नेताओं के साथ थाने में ‘थर्ड डिग्री’ का इस्तेमाल करते हुए मारपीट की गई। अखिलेश यादव ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने के साथ दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दिग्विजय भाटी के आरोपों के बाद गरमाया मामला
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया अमरोहा निवासी सपा कार्यकर्ता दिग्विजय भाटी के आरोपों के बाद सामने आई। भाटी ने दावा किया कि मेरठ में एक दलित युवती की हत्या के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के बाद उनके साथ पुलिस ने कथित तौर पर मारपीट की। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाटी की तस्वीर भी साझा की, जिसमें उनकी एक आंख बुरी तरह सूजी हुई दिखाई दे रही है।
अखिलेश बोले- किसान का अपमान देश का अपमान
सपा प्रमुख ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसान का अपमान पूरे देश का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक किसान के साथ कथित तौर पर मारपीट कर भाजपा सरकार ने देशभर के किसानों को संदेश देने की कोशिश की है। अखिलेश ने दावा किया कि किसान नेताओं को थाने में कथित ‘थर्ड डिग्री’ देकर प्रताड़ित किया जाना सरकार की घबराहट को दर्शाता है। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है।
दिग्विजय भाटी ने वीडियो में सुनाई पूरी आपबीती
दिग्विजय भाटी ने सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो में घटना को लेकर अपनी आपबीती बताई। उन्होंने दावा किया कि 19 अगस्त के आसपास मेरठ के तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय ने प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर उनके साथ मारपीट की। भाटी के मुताबिक, स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप यानी SOG के कुछ सदस्य उन्हें एक अज्ञात स्थान पर लेकर गए, जहां कई घंटों तक कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई।
पुलिस ने शिकायतों का संज्ञान लेकर शुरू कराई जांच
मामले में पुलिस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। मेरठ पुलिस ने कहा कि 19 अगस्त को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। पुलिस के अनुसार, मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर ने पूरे मामले की जांच सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह को सौंपी है। डीआईजी को तथ्यों के आधार पर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय का हुआ तबादला
इस विवाद के बीच मेरठ के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय का गुरुवार शाम लखनऊ तबादला कर दिया गया। तबादले के बाद मामले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हालांकि, पुलिस की जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
किसानों के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने मेरठ की घटना को किसानों से जुड़े व्यापक मुद्दों से जोड़ते हुए भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार खेती-किसानी, भंडारण, बीज, उर्वरक और कृषि उपज के व्यापार तथा विपणन को कुछ लोगों के हाथों में सौंपने के लिए विदेशी संस्थाओं के साथ समझौते कर रही है।
MSP और खाद की किल्लत को लेकर भी निशाना
सपा प्रमुख ने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की MSP संबंधी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया और कृषि उपज की खरीद के वादों से भी पीछे हटने की कोशिश हुई। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानियां बढ़ी हैं।
किसान आंदोलन और जमीन अधिग्रहण पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने जमीन अधिग्रहण और तीन कृषि कानूनों का मुद्दा उठाते हुए भाजपा सरकार पर किसानों की संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों की मौत का जिक्र करते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने किसान आत्महत्याओं और आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
जांच रिपोर्ट से साफ होगी मेरठ घटना की सच्चाई
मेरठ की घटना को लेकर फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। सपा जहां पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रही है, वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब सहारनपुर रेंज के डीआईजी की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शनकारियों के साथ वास्तव में क्या हुआ और कथित मारपीट के लिए कौन जिम्मेदार है।
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