Data Center History: आज जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की चर्चा होती है, तो डेटा सेंटर का जिक्र भी तेजी से होने लगता है। ChatGPT, मशीन लर्निंग, बड़े सर्वर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसे शब्दों के साथ डेटा सेंटर को जोड़कर देखा जाता है। AI के बढ़ते इस्तेमाल ने निश्चित रूप से डेटा सेंटरों की मांग और बिजली की खपत दोनों को बढ़ाया है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि डेटा सेंटर कोई नई तकनीक नहीं हैं। AI के लोकप्रिय होने से कई दशक पहले से ही इनका इस्तेमाल महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं और सूचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता रहा है।
AI से पहले डेटा सेंटर क्यों थे बेहद जरूरी
डेटा सेंटर ऐसी विशेष जगह होती है, जहां बड़ी संख्या में कंप्यूटर सर्वर, स्टोरेज सिस्टम, नेटवर्किंग उपकरण और अन्य तकनीकी संसाधन लगाए जाते हैं। इनका मुख्य काम डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखना, उसका प्रबंधन करना और जरूरत पड़ने पर उसे तेजी से प्रोसेस करके उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाना होता है। AI के आने से पहले भी सरकारी संस्थाओं, बैंकों, कंपनियों और विभिन्न संगठनों के महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड इन्हीं सर्वरों पर सुरक्षित रखे जाते थे। बड़ी मात्रा में डेटा को व्यवस्थित तरीके से संभालने के लिए डेटा सेंटर बेहद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा रहे हैं।
इंटरनेट की दुनिया के पीछे काम करते हैं सर्वर
जब कोई व्यक्ति अपने मोबाइल या कंप्यूटर से वेबसाइट खोलता है, ऑनलाइन वीडियो देखता है या किसी डिजिटल सेवा का इस्तेमाल करता है, तो उसके डिवाइस और संबंधित सर्वर के बीच लगातार डेटा का आदान-प्रदान होता है। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे डेटा सेंटर की अहम भूमिका होती है। किसी वेबसाइट की फाइलें, यूजर अकाउंट, तस्वीरें, वीडियो और दूसरी डिजिटल जानकारी सर्वरों में संग्रहित रहती हैं। यूजर जब किसी वेबसाइट या ऑनलाइन सेवा पर कोई अनुरोध भेजता है, तो डेटा सेंटर उस रिक्वेस्ट को प्रोसेस करके जरूरी जानकारी वापस भेजता है।
ईमेल और सोशल मीडिया भी डेटा सेंटर पर निर्भर
AI से पहले डेटा सेंटरों का इस्तेमाल ईमेल, सोशल मीडिया और क्लाउड स्टोरेज जैसी सेवाओं के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता था। Gmail जैसी ईमेल सेवाओं में भेजे और प्राप्त किए गए संदेश सर्वरों पर सुरक्षित रहते हैं। इसी तरह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हर दिन करोड़ों तस्वीरें, वीडियो, पोस्ट और अन्य सामग्री अपलोड की जाती है। इन सभी डिजिटल फाइलों को स्टोर करने और जरूरत पड़ने पर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद यूजर्स तक पहुंचाने के लिए डेटा सेंटर आवश्यक होते हैं। क्लाउड स्टोरेज ने इस निर्भरता को और बढ़ाया।
AI ने डेटा सेंटर की जरूरत और क्षमता बढ़ाई
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार के बाद डेटा सेंटरों की भूमिका पहले की तुलना में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। सामान्य वेबसाइट, ईमेल या डेटाबेस के मुकाबले AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और संचालित करने के लिए कहीं अधिक कंप्यूटिंग क्षमता चाहिए। बड़े AI मॉडल विशाल मात्रा में डेटा का विश्लेषण करते हैं और इसके लिए शक्तिशाली प्रोसेसर, ज्यादा मेमोरी तथा तेज नेटवर्किंग सिस्टम की जरूरत पड़ती है। इसी कारण आधुनिक डेटा सेंटरों में GPU और अन्य हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग हार्डवेयर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
बढ़ती AI मांग से बिजली की खपत भी बढ़ी
AI आधारित सेवाओं के विस्तार का असर डेटा सेंटरों की ऊर्जा जरूरत पर भी पड़ा है। पहले जहां मुख्य रूप से डेटा स्टोरेज और सामान्य कंप्यूटिंग पर जोर था, वहीं अब AI मॉडल की ट्रेनिंग और संचालन के लिए लगातार ज्यादा कंप्यूटिंग शक्ति की आवश्यकता होती है। इसके कारण आधुनिक डेटा सेंटरों में बिजली की खपत और कूलिंग सिस्टम की जरूरत भी बढ़ रही है। यानी AI ने डेटा सेंटरों को खत्म नहीं किया, बल्कि उनके पुराने बुनियादी कामों के ऊपर एक नया और बेहद शक्तिशाली कंप्यूटिंग स्तर जोड़ दिया है।
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