CG High Court : बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक (कृषि) के पदों पर भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में 65 अभ्यर्थियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। अभ्यर्थियों ने वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में B.Ed. की अनिवार्य योग्यता से एकमुश्त छूट देने की मांग की थी। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और भर्ती की पात्रता तय करना राज्य सरकार तथा सक्षम नियम बनाने वाले प्राधिकारी का अधिकार है। अदालत अपनी ओर से निर्धारित अनिवार्य योग्यता में छूट नहीं दे सकती।
65 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी याचिका
मामले में कुल 65 अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उनका तर्क था कि वर्ष 2019 से लागू पात्रता व्यवस्था में शिक्षक (कृषि) पद के लिए B.Ed. अनिवार्य नहीं था। इसी आधार पर वे पहले से इस पद के लिए पात्र माने जाते थे। हालांकि बाद में भर्ती नियमों में बदलाव हुआ और B.Ed. को अनिवार्य योग्यता में शामिल कर दिया गया। अभ्यर्थियों ने इसी बदलाव के चलते वर्तमान भर्ती में उन्हें राहत देने की मांग की थी।
अशोकानंद पटेल मामले के बाद बदले भर्ती नियम
दरअसल, अशोकानंद पटेल बनाम स्टेट ऑफ छत्तीसगढ़ एवं अन्य मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पहले दी गई B.Ed. संबंधी छूट को असंवैधानिक और अधिकारातीत करार दिया था। अदालत ने राज्य सरकार को NCTE Regulations, 2014 के अनुरूप आवश्यक योग्यता निर्धारित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने 13 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर शिक्षक (कृषि) के पद के लिए B.Ed. को अनिवार्य योग्यता बना दिया।
अभ्यर्थियों ने मांगी थी एकमुश्त संक्रमणकालीन राहत
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि शिक्षक (कृषि) भर्ती का शॉर्ट विज्ञापन 28 जुलाई 2026 को जारी किया गया था और आवेदन की अंतिम तारीख 2 सितंबर 2026 रखी गई है। उनका कहना था कि B.Ed. पाठ्यक्रम पूरा करने में लगभग दो शैक्षणिक वर्ष लगते हैं। इसलिए जिन उम्मीदवारों को पुराने नियमों के तहत पात्रता हासिल थी, उन्हें नई योग्यता पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। उन्होंने अदालत से मांग की कि वर्तमान भर्ती में B.Ed. के बिना आवेदन की अनुमति दी जाए और चयन होने के बाद निर्धारित अवधि में B.Ed. पूरा करने का अवसर दिया जाए।
राज्य सरकार ने अभ्यर्थियों की मांग का किया विरोध
राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड ने अभ्यर्थियों की मांग का विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि अशोकानंद पटेल मामले में डिवीजन बेंच पहले ही B.Ed. की आवश्यकता को स्पष्ट कर चुकी है। ऐसे में वर्तमान नियमों में निर्धारित अनिवार्य योग्यता से न्यायालय द्वारा किसी विशेष वर्ग को छूट देना उचित नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने योग्यता तय करना सरकार का अधिकार बताया
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभ्यर्थियों ने B.Ed. की अनिवार्यता को सीधे चुनौती नहीं दी है, बल्कि वे केवल वर्तमान भर्ती के लिए विशेष राहत चाहते हैं। अदालत ने माना कि पूर्व में दी गई B.Ed. छूट को असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। इसलिए वर्तमान नियमों में निर्धारित योग्यता पूरी किए बिना उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं मांग सकते।
कोर्ट ने कहा, नई छूट देना नियमों में अपवाद होगा
अदालत ने स्पष्ट किया कि B.Ed. जैसी अनिवार्य योग्यता से विशेष छूट देना प्रभावी रूप से मौजूदा नियमों में नया अपवाद बनाने के समान होगा। पात्रता मानदंड, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और सेवा संबंधी नियम तय करना राज्य सरकार या सक्षम नियम बनाने वाले प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायपालिका इन शर्तों को अपनी राय से बदल नहीं सकती।
Article 226 के तहत कोर्ट की समीक्षा सीमित
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के Article 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का दायरा भर्ती नियमों को अपनी सुविधा के अनुसार बदलने तक नहीं है। अदालत यह देख सकती है कि निर्णय प्रक्रिया कानूनसम्मत है या नहीं, उसमें मनमानी, दुर्भावना या संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। लेकिन व्यक्तिगत अभ्यर्थियों को सुविधा देने के लिए अनिवार्य योग्यता को माफ करना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
अभ्यर्थियों की याचिका मोशन स्टेज पर ही खारिज
सभी दलीलों पर विचार करने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 65 अभ्यर्थियों को एकमुश्त संक्रमणकालीन छूट देने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका को मोशन स्टेज पर ही खारिज कर दिया। फैसले के बाद शिक्षक (कृषि) भर्ती के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि मौजूदा नियमों के तहत B.Ed. अनिवार्य योग्यता है और केवल पुराने नियमों के तहत पात्र होने के आधार पर इस शर्त से न्यायिक छूट नहीं मिल सकती।
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