Caste Census 2026: देश में आरक्षण को लेकर चल रही बहस के बीच कांग्रेस ने एक बार फिर जाति जनगणना का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह जाति जनगणना को सही तरीके से कराने के लिए गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जातियों की वास्तविक संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकड़ा सामने नहीं आएगा तो सामाजिक न्याय की नीतियों को प्रभावी तरीके से लागू करना मुश्किल होगा।
जयराम रमेश ने सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने सरकार की मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिस तरीके से जाति जनगणना कराने की तैयारी की जा रही है, उससे अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं होंगे। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय के उद्देश्य से जुड़ा हुआ विषय बताते हुए सरकार से मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की। कांग्रेस नेता के मुताबिक जातियों की वास्तविक गणना के बिना आरक्षण और सामाजिक कल्याण से जुड़ी नीतियों के लिए मजबूत आधार तैयार नहीं हो सकता।
बिहार और तेलंगाना मॉडल अपनाने की मांग
कांग्रेस महासचिव ने केंद्र सरकार से मांग की कि जाति जनगणना के लिए बिहार और तेलंगाना में अपनाए गए तरीकों का अध्ययन किया जाए और जरूरत के मुताबिक उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर विशेषज्ञों से सलाह लेने के साथ सभी राजनीतिक दलों को भी चर्चा में शामिल किया जाना चाहिए। इसके लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी उन्होंने रखी।
आरक्षण और जनसंख्या के आंकड़ों का बताया संबंध
जयराम रमेश ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों पर भी निर्भर करती है। ऐसे में यदि विभिन्न जातियों की संख्या का सही और विश्वसनीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं होगा तो सामाजिक न्याय की नीतियों को मजबूत आधार नहीं मिल पाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जाति जनगणना की प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाया जाए, ताकि भविष्य में मिलने वाले आंकड़े नीति निर्माण में उपयोगी साबित हो सकें।
पीएम मोदी को लिखे तीन पत्रों का किया जिक्र
जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस की ओर से जातिगत जनगणना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक तीन पत्र भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 20 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को 21 पन्नों का पत्र भेजा है। इसमें जातिगत जनगणना को प्रभावी ढंग से कराने से जुड़े सुझाव रखे गए हैं।
2023 में खरगे ने लिखा था पहला पत्र
कांग्रेस नेता के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इससे पहले 16 अप्रैल 2023 को प्रधानमंत्री को जाति जनगणना के संबंध में पहला पत्र लिखा था। इसके बाद 5 मई 2025 को दूसरा पत्र भेजा गया। जयराम रमेश का दावा है कि दूसरे पत्र में कांग्रेस की ओर से कई रचनात्मक सुझाव भी दिए गए थे। हालांकि, उनके अनुसार दोनों पत्रों का अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।
सही आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय अधूरा
जयराम रमेश ने कहा कि भारत में सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को प्रभावी बनाने के लिए विश्वसनीय आंकड़ों की आवश्यकता है। विभिन्न जातियों की संख्या, उनकी सामाजिक स्थिति और आर्थिक परिस्थितियों का सही आकलन तभी किया जा सकता है, जब जातियों की गिनती व्यवस्थित और सटीक तरीके से की जाए। उनका कहना है कि आंकड़ों की कमी नीति निर्माण को प्रभावित कर सकती है।
Open-ended सवालों पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति
कांग्रेस महासचिव ने जनगणना में जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने के लिए सरकार द्वारा अपनाए जा रहे open-ended प्रश्न के तरीके पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया से प्राप्त आंकड़ों में भ्रम और असमानता की संभावना रह सकती है। अलग-अलग नामों और जातीय पहचान के कारण आंकड़ों का वर्गीकरण भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरकार से प्रक्रिया बदलने की अपील
जयराम रमेश ने केंद्र से मौजूदा व्यवस्था को रद्द कर अधिक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सामाजिक न्याय को लेकर प्रतिबद्ध है तो उसे विशेषज्ञों और सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जाति जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश में सामाजिक और आर्थिक नीतियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
Read More : Rahul Dravid WTC Statement: फाइनल की रेस में पिछड़ी टीम इंडिया, द्रविड़ के बयान से बढ़ी फैंस की चिंता