Jaggery Price Hike: हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। अब गुड़ के दामों में भी अचानक बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। जो गुड़ कुछ समय पहले तक करीब 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर 80 से 90 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। यानी गुड़ के भाव में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे मिठास के लिए गुड़ का इस्तेमाल करने वाले परिवारों का बजट भी प्रभावित होने लगा है।
80 से 90 रुपये किलो तक पहुंचा गुड़ का भाव
बाजार में गुड़ की कीमतों में तेजी का असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। पहले कम कीमत के कारण कई लोग चीनी की जगह गुड़ को प्राथमिकता देते थे, लेकिन अब इसके दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। मौजूदा कीमतों को देखते हुए कहा जा रहा है कि महंगाई के मामले में गुड़ ने भी चीनी को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और गुड़ की गुणवत्ता के आधार पर कीमतों में अंतर हो सकता है।
भारत दुनिया में सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक देश
भारत को अपनी घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए गुड़ का आयात नहीं करना पड़ता। देश गुड़ उत्पादन के मामले में दुनिया में सबसे आगे है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल गुड़ उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा भारत में तैयार होता है। देश में पैदा होने वाले कुल गन्ने का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इस वजह से भारत न केवल घरेलू मांग पूरी करता है, बल्कि बड़ी मात्रा में गुड़ का निर्यात भी करता है।
भारत ने 2025-26 में किया गुड़ का निर्यात
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने करीब 471.9 मीट्रिक टन गुड़ का निर्यात किया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में गुड़ का उत्पादन और कारोबार बड़े स्तर पर होता है। इसके बावजूद घरेलू बाजार में कीमतों का बढ़ना कई आपूर्ति संबंधी परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है। पुराने स्टॉक में कमी और नई फसल की उपलब्धता में अंतर इसका एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
चीनी महंगी होने से बढ़ी गुड़ की मांग
गुड़ की कीमत बढ़ने की एक प्रमुख वजह चीनी के दामों में आई तेजी भी मानी जा रही है। चीनी महंगी होने के बाद कई उपभोक्ता वैकल्पिक मिठास के तौर पर गुड़ का इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे बाजार में गुड़ की मांग बढ़ गई है। मांग बढ़ने के साथ उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ा और कीमतों में तेजी देखने को मिली।
पुराना स्टॉक घटने से आपूर्ति पर दबाव
पिछले पेराई सीजन से बचा गुड़ का स्टॉक अब लगभग समाप्त होने की स्थिति में बताया जा रहा है। दूसरी ओर नई पेराई शुरू होने में देरी से बाजार में ताजा गुड़ की उपलब्धता प्रभावित हुई है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया। जब बाजार में पुराना स्टॉक कम हो और नई आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न हो, तो कीमतों में बढ़ोतरी स्वाभाविक रूप से देखने को मिलती है।
एथेनॉल उत्पादन का भी पड़ रहा असर
गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों के इस्तेमाल में आए बदलाव का असर गुड़ के उत्पादन पर भी पड़ रहा है। एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और उसके विभिन्न बाय-प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे गन्ने के उपलब्ध संसाधनों पर दबाव बन रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका अप्रत्यक्ष असर चीनी के साथ-साथ गुड़ की उपलब्धता और कीमतों पर भी पड़ सकता है।
ओणम के दौरान दक्षिण भारत में बढ़ती मांग
त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ गुड़ और चीनी की मांग में और तेजी आने की संभावना है। खासतौर पर ओणम के दौरान दक्षिण भारत में मिठास और पारंपरिक खाद्य पदार्थों के लिए गुड़ की मांग बढ़ जाती है। सामान्य दिनों में केरल और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में चीनी की आपूर्ति के लिए करीब 80 ट्रक पहुंचते हैं। प्रत्येक ट्रक में लगभग 40 टन चीनी होती है। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर करीब 240 ट्रकों की जरूरत पड़ सकती है।
त्योहारी मांग से कीमतों पर और बढ़ सकता है दबाव
ओणम और अन्य त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग से गुड़ और चीनी दोनों की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में यदि नई पेराई समय पर शुरू नहीं होती और पुराना स्टॉक सीमित रहता है, तो गुड़ की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल बढ़ते दामों ने आम उपभोक्ताओं के लिए गुड़ को भी महंगी मिठास बना दिया है।
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