Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं को सामने लाने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पत्रकार का आरोप है कि उन्हें अलग-अलग मामलों में फंसाकर परेशान किया जा रहा है। उनका दावा है कि राम मंदिर से संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों और पुलिस की कार्रवाई के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
सड़क पर हंगामे और मारपीट के मामले में दर्ज हुई FIR
गाजियाबाद पुलिस ने अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ सड़क पर कथित हंगामा और मारपीट से जुड़े मामले में FIR दर्ज की है। पत्रकार का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया में उलझाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी FIR को रद्द कराने की मांग को लेकर उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया है। मामले में अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजर है।
सुप्रीम कोर्ट में वकील ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पत्रकार की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि राम मंदिर में चंदे और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी रिपोर्टिंग के बाद से अभिषेक को परेशान किया जा रहा है। वकील ने अदालत को बताया कि पत्रकार के घर की तलाशी ली गई और उनके खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। वकील के मुताबिक, एक मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।
मंगलवार को होगी मामले की सुनवाई
पत्रकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की सुनवाई सोमवार या मंगलवार को करने का अनुरोध किया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई मंगलवार को करने की बात कही। अब अदालत यह देखेगी कि FIR और पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोपों के संबंध में क्या कानूनी राहत दी जा सकती है।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट और चढ़ावे को लेकर उठे सवाल
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन वर्ष 2020 में हुआ था। इसके बाद राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मंदिर में बड़ी मात्रा में नकद चढ़ावा और सोने-चांदी के आभूषण जमा हुए हैं। इसी संपत्ति से जुड़े कथित गबन या चोरी के आरोपों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
मंदिर कर्मचारियों की भूमिका की जांच का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर से कुछ वस्तुओं के गायब होने की शिकायतों के बाद मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई। जांच के दौरान मंदिर से जुड़े कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की बात सामने आई। साथ ही ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका की जांच किए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही तय मानी जाएगी।
कैश चढ़ावे में बढ़ोतरी का किया गया दावा
रिपोर्ट में मंदिर के सरकारी पंजीकृत खाते में जमा होने वाले दैनिक नकद चढ़ावे के आंकड़ों का भी जिक्र किया गया है। दावा किया गया है कि पहले रोजाना करीब 16 से 18 लाख रुपये जमा होते थे, जबकि बाद में यह राशि बढ़कर लगभग 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन हो गई। इस आधार पर रिपोर्ट में कथित तौर पर प्रतिदिन करीब आठ लाख रुपये की नकद राशि के अंतर को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
सोने-चांदी के आभूषणों को लेकर भी जांच जारी
मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाले सोने और चांदी के आभूषणों का हिसाब भी इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कथित रूप से गायब सोने से जुड़ी पूरी जानकारी अब तक सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने चढ़ावे, आभूषणों और अन्य संपत्तियों के रिकॉर्ड का मिलान करना अहम होगा।
FIR के बाद बढ़ा विवाद, अब अदालत पर निगाहें
पत्रकार के खिलाफ FIR और उनके द्वारा लगाए गए पुलिस उत्पीड़न के आरोपों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। एक ओर पुलिस कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी चर्चा में हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पत्रकार को FIR के मामले में क्या राहत मिलती है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
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