Honey vs Jaggery vs Sugar: मीठा खाने की इच्छा लगभग हर किसी को होती है, लेकिन ज्यादा चीनी का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है। अधिक मात्रा में अतिरिक्त शुगर लेने से शरीर को जरूरत से ज्यादा कैलोरी मिल सकती है, जिससे वजन बढ़ने और मोटापे का जोखिम बढ़ सकता है। इसी वजह से कई लोग चाय-कॉफी में सफेद चीनी की जगह गुड़, गुड़ का पाउडर या शहद इस्तेमाल करने लगते हैं। लोगों को लगता है कि प्राकृतिक होने के कारण ये विकल्प ज्यादा हेल्दी होंगे। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? जाने-माने कैंसर सर्जन डॉ. जयेश शर्मा ने सोशल मीडिया पर साझा किए एक वीडियो में इस भ्रम को लेकर जानकारी दी है।
क्या गुड़ और शहद चीनी से बेहतर विकल्प हैं?
डॉ. जयेश शर्मा के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सफेद चीनी को ज्यादा नुकसानदायक मानकर उसकी जगह गुड़ या शहद इस्तेमाल कर रहा है, तो इसे बहुत बड़ा स्वास्थ्य लाभ नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि इन तीनों चीजों में मौजूद मुख्य घटक शुगर ही है और इन्हें अतिरिक्त शुगर के स्रोत के तौर पर देखा जाना चाहिए। इसलिए केवल चीनी बदलकर गुड़ या शहद लेने से अतिरिक्त शुगर का सेवन खत्म नहीं हो जाता।
गुड़ को बताया चीनी का देसी रिश्तेदार
डॉक्टर ने अपने वीडियो में गुड़ को चीनी का गांव का रिश्तेदार और शहद को उसका विदेशी रिश्तेदार बताते हुए समझाया कि तीनों का इस्तेमाल आखिरकार शरीर में अतिरिक्त शुगर पहुंचाता है। गुड़ और शहद को प्राकृतिक या कम प्रोसेस्ड मानने के कारण लोग इन्हें अधिक सुरक्षित समझ लेते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें कितनी भी मात्रा में लिया जा सकता है। ज्यादा सेवन यहां भी अतिरिक्त कैलोरी और ब्लड शुगर बढ़ने जैसी समस्या पैदा कर सकता है।
गुड़ में पोषक तत्व हैं, लेकिन मात्रा बहुत कम
सफेद चीनी मुख्य रूप से कैलोरी और शुगर प्रदान करती है तथा इसमें पोषक तत्वों की मात्रा बेहद कम होती है। दूसरी ओर, गुड़ कम रिफाइंड उत्पाद है और इसमें आयरन जैसे कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, गुड़ में इन पोषक तत्वों की मात्रा इतनी अधिक नहीं होती कि इसे आयरन की कमी दूर करने का प्रमुख स्रोत माना जाए। इसलिए केवल पोषण पाने के उद्देश्य से बड़ी मात्रा में गुड़ खाना सही रणनीति नहीं है।
शहद में एंटीऑक्सीडेंट, फिर भी मात्रा जरूरी
शहद में चीनी की तुलना में कुछ एंटीऑक्सीडेंट और अन्य जैविक यौगिक पाए जा सकते हैं। इसके बावजूद शहद भी मुख्य रूप से शर्करा का स्रोत है और इसे असीमित मात्रा में लेना स्वस्थ विकल्प नहीं माना जा सकता। खासकर जब शहद को चाय जैसे गर्म पेय में थोड़ी मात्रा में मिलाकर लिया जाता है, तब इसके पोषण संबंधी फायदे को लेकर बहुत ज्यादा उम्मीद करना उचित नहीं है। इसलिए शहद को भी अतिरिक्त शुगर की कुल मात्रा में शामिल करना चाहिए।
चाय में गुड़ डालने से क्या बदलता है?
कई लोग चाय में सफेद चीनी की जगह गुड़ या गुड़ की शक्कर डालते हैं और मानते हैं कि इससे चाय हेल्दी बन जाती है। लेकिन गुड़ डालने से चाय में मौजूद शुगर खत्म नहीं होती। यदि मात्रा अधिक है तो शरीर को अतिरिक्त कैलोरी और शर्करा मिलती रहेगी। इसलिए असली ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि व्यक्ति पूरे दिन में कुल कितनी अतिरिक्त शुगर ले रहा है, न कि केवल यह कि उसने चीनी की जगह कौन-सा मीठा पदार्थ इस्तेमाल किया।
रोज कितनी अतिरिक्त चीनी लेना ठीक है?
डॉ. शर्मा ने इस बात पर भी जोर दिया कि सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि व्यक्ति दिनभर में कितनी चीनी खा रहा है। उनके मुताबिक, कुल दैनिक कैलोरी का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा अतिरिक्त चीनी से आना चाहिए। हालांकि व्यक्तिगत जरूरत उम्र, गतिविधि, वजन और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। त्योहारों, पार्टियों और समारोहों में मिठाइयों, मीठे पेय और अन्य खाद्य पदार्थों के कारण शुगर का सेवन अचानक काफी बढ़ सकता है।
त्योहारों में बढ़ जाता है मीठे का सेवन
आमतौर पर रोजाना चाय या भोजन में थोड़ी मात्रा में चीनी लेने और त्योहारों के दौरान कई तरह की मिठाइयां खाने में बड़ा अंतर होता है। मिठाई, डेजर्ट, मीठे पेय और पैकेज्ड फूड से मिलने वाली अतिरिक्त शुगर भी कुल सेवन में जुड़ती है। इसलिए सिर्फ चाय में चीनी कम कर देने से पूरी समस्या हल नहीं होती। पूरे दिन के खानपान पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
क्या गुड़ आयरन की कमी पूरी कर सकता है?
गुड़ को अक्सर आयरन का अच्छा स्रोत बताकर खून की कमी दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि गुड़ में कुछ मात्रा में आयरन मौजूद हो सकता है, लेकिन केवल गुड़ के भरोसे आयरन की कमी या एनीमिया का इलाज करना उचित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति में आयरन की कमी है तो डॉक्टर की सलाह से जांच, संतुलित आहार और जरूरत पड़ने पर उचित सप्लीमेंट लेना ज्यादा प्रभावी तरीका है।
आखिर चीनी, गुड़ या शहद में क्या चुनें?
निष्कर्ष यह है कि चीनी, गुड़ और शहद में से किसी को भी बिना सीमा के हेल्दी स्वीटनर नहीं माना जाना चाहिए। स्वाद के लिए व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार इनमें से कोई विकल्प चुन सकता है, लेकिन मात्रा नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है। अगर रोजमर्रा के भोजन में अतिरिक्त शुगर कम की जाए तो यह किसी एक स्वीटनर को दूसरे से बदलने की तुलना में ज्यादा उपयोगी कदम हो सकता है।
मीठे की मात्रा कम करना है सबसे जरूरी
अगर आप चाय में चीनी की जगह गुड़ या शहद इस्तेमाल करते हैं, तो इसे अपने आप में बड़ा स्वास्थ्य समाधान न मानें। बेहतर तरीका यह है कि धीरे-धीरे मीठे का स्वाद कम करने की आदत विकसित की जाए और मिठाइयों, मीठे पेय तथा ज्यादा शुगर वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखा जाए। किसी खास बीमारी, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्या में अपनी डाइट के अनुसार डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लेना बेहतर है।
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