High Protein Diet for Women: 30 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई शारीरिक बदलाव धीरे-धीरे दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान मांसपेशियों का मास कम होना, हड्डियों की मजबूती प्रभावित होना, हार्मोनल बदलाव और ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है। फिटनेस एक्सपर्ट श्वेतांबरी शेट्टी के अनुसार, खानपान भी इन बदलावों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक है। भारतीय भोजन में अक्सर कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक और प्रोटीन अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना शरीर की फिटनेस बनाए रखने में मदद कर सकता है।
मसल्स और हड्डियों के लिए प्रोटीन की भूमिका
प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में शामिल है। यह मांसपेशियों के निर्माण और रखरखाव के साथ-साथ शरीर की रिकवरी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उम्र बढ़ने के साथ मसल्स मास को बनाए रखना विशेष रूप से जरूरी हो जाता है। नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ पर्याप्त प्रोटीन लेने से मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की प्रोटीन जरूरत उसकी उम्र, वजन, गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
30 के बाद मसल्स लॉस का बढ़ सकता है खतरा
श्वेतांबरी शेट्टी के मुताबिक, 30 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में हर दशक के दौरान मांसपेशियों के मास में कमी आ सकती है। मेनोपॉज के बाद यह प्रक्रिया और तेज हो सकती है। इसका एक कारण एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होना भी माना जाता है। एस्ट्रोजन हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। इसलिए इस उम्र में संतुलित डाइट, पर्याप्त प्रोटीन और नियमित एक्सरसाइज पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा विकल्प
शाकाहारी महिलाओं के लिए पनीर प्रोटीन बढ़ाने का आसान विकल्प हो सकता है। इसमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम भी पाया जाता है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। उपलब्ध पोषण आंकड़ों के अनुसार, 100 ग्राम पनीर में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन हो सकता है, हालांकि मात्रा ब्रांड और बनाने की विधि के अनुसार बदल सकती है। इसे सब्जी, सलाद या अन्य व्यंजनों के साथ डाइट में शामिल किया जा सकता है।
डेयरी से दूरी हो तो टोफू अपनाएं
जो महिलाएं डेयरी उत्पाद नहीं लेतीं या वीगन डाइट फॉलो करती हैं, उनके लिए टोफू प्रोटीन का उपयोगी प्लांट-बेस्ड स्रोत हो सकता है। टोफू सोयाबीन से तैयार किया जाता है और इसे सब्जी, सलाद या अन्य व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है। सोया आधारित खाद्य पदार्थ संतुलित आहार के हिस्से के रूप में प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं।
अंडा देता है अच्छी मात्रा में प्रोटीन
अंडे को भी प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। एक सामान्य अंडे में लगभग 6 ग्राम प्रोटीन हो सकता है। इस हिसाब से दो अंडों से करीब 12 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है। अंडे की जर्दी में विटामिन डी समेत कई अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। हालांकि, अंडे को किस तरह पकाया जा रहा है, यह भी संपूर्ण पोषण पर असर डालता है।
सोयाबीन शाकाहारी प्रोटीन का स्रोत
जो महिलाएं अंडा या मांसाहारी खाद्य पदार्थ नहीं खातीं, वे सोयाबीन को डाइट में शामिल कर सकती हैं। सोयाबीन में अच्छी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है और इसे विभिन्न तरीकों से भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। इसकी मात्रा व्यक्ति की कुल डाइट और प्रोटीन जरूरत के अनुसार तय की जानी चाहिए। केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग प्रोटीन स्रोतों को डाइट में शामिल करना बेहतर है।
दाल, चना और राजमा भी हैं उपयोगी
भारतीय भोजन में आसानी से मिलने वाली दालें, चना, छोले और राजमा भी प्रोटीन के अच्छे प्लांट-बेस्ड स्रोत हैं। एक कटोरी पकी हुई दाल से लगभग 11 से 15 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है, हालांकि वास्तविक मात्रा दाल के प्रकार और सर्विंग पर निर्भर करती है। इन्हें सब्जियों, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित भोजन में शामिल किया जा सकता है।
डाइट के साथ एक्सरसाइज भी जरूरी
30 के बाद महिलाओं के लिए केवल प्रोटीन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। मांसपेशियों और हड्डियों की सेहत के लिए पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार भी महत्वपूर्ण हैं। खासकर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसी एक्सरसाइज मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। यदि किसी महिला को कोई स्वास्थ्य समस्या है या वह विशेष डाइट अपनाना चाहती है, तो डाइटिशियन या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
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