Raksha Bandhan 2026: कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में स्थित भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रभावना, सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और आपसी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई। स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस दौरान लोगों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर प्रेम और विश्वास का संदेश दिया गया। समारोह में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ का गायन भी किया गया, जिससे कार्यक्रम का माहौल देशभक्ति से भर गया।
पारंपरिक अंदाज में नजर आए सुवेंदु अधिकारी
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी का पारंपरिक अंदाज खास आकर्षण का केंद्र रहा। वह पीले रंग के कुर्ता-पायजामा और गमछे में नजर आए। उन्होंने भवानीपुर की सड़कों पर आयोजित पदयात्रा में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके गले में पारंपरिक श्रीखोल दिखाई दिया, जिसे उन्होंने स्वयं बजाया। स्थानीय लोगों और समर्थकों के साथ वह हरिनाम संकीर्तन और ‘वंदे मातरम’ की धुन में शामिल हुए। उनके इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
श्रीखोल की थाप और संकीर्तन से गूंजा इलाका
पदयात्रा के दौरान पारंपरिक संगीत और धार्मिक संकीर्तन का माहौल देखने को मिला। सुवेंदु अधिकारी ने श्रीखोल बजाते हुए लोगों के साथ कदम मिलाया। उनके साथ बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। महिलाओं की भागीदारी भी कार्यक्रम में उल्लेखनीय रही। सड़क पर निकली इस पदयात्रा के दौरान सांस्कृतिक परंपराओं और रक्षाबंधन के संदेश को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया।
रक्षासूत्र बांधकर दिया एकता का संदेश
कार्यक्रम में स्थानीय महिलाओं ने लोगों की कलाई पर राखी और रक्षासूत्र बांधा। आयोजकों का कहना था कि रक्षाबंधन को केवल भाई-बहन के पारिवारिक रिश्ते तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव के पर्व के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। रक्षासूत्र के माध्यम से लोगों के बीच प्रेम, विश्वास और भाईचारे की भावना मजबूत करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता को प्रमुखता दी गई।
टैगोर और बंग-भंग आंदोलन का किया उल्लेख
आयोजकों ने रक्षाबंधन के ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बंग-भंग विरोधी आंदोलन के दौर में रवींद्रनाथ टैगोर ने रक्षाबंधन को सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करने का संदेश दिया था। इसी संदर्भ को कार्यक्रम से जोड़ते हुए लोगों के बीच एकजुटता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने की बात कही गई। इस दौरान सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रभावना पर भी जोर दिया गया।
भवानीपुर की सड़कों पर दिखा उत्सव का रंग
कार्यक्रम के दौरान भवानीपुर इलाके की सड़कों पर उत्सवी माहौल देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाएं, पार्टी कार्यकर्ता और अन्य नागरिक एक-दूसरे को रक्षासूत्र बांधते नजर आए। पारंपरिक संगीत, संकीर्तन और देशभक्ति गीतों के कारण पूरे आयोजन में सांस्कृतिक रंग दिखाई दिया। आयोजकों ने इसे सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश देने वाला कार्यक्रम बताया।
सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हुआ कार्यक्रम
रक्षाबंधन समारोह की गतिविधियों को सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों तक पहुंचाया गया। पदयात्रा, श्रीखोल वादन और ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन का प्रसारण किया गया। कार्यक्रम के मंच की पृष्ठभूमि में भारत का नक्शा और विशाल रक्षासूत्र भी नजर आया। आयोजकों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से आयोजन को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का उद्देश्य रखा गया था।
प्रेम और राष्ट्रभावना को जोड़ने की कोशिश
आयोजकों ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य रक्षाबंधन के पारंपरिक महत्व को सामाजिक एकता, भाईचारे और राष्ट्रभावना से जोड़ना था। कार्यक्रम में सांस्कृतिक परंपराओं के साथ लोगों की सामूहिक भागीदारी को महत्व दिया गया। रक्षासूत्र बांधने से लेकर ‘वंदे मातरम’ के गायन तक विभिन्न गतिविधियों के जरिए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई। भवानीपुर में आयोजित यह कार्यक्रम इसी संदेश के साथ संपन्न हुआ।
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