Italy Blue Crab : इटली के समुद्री इलाकों में इन दिनों ब्लू क्रैब यानी नीले केकड़ों की तेजी से बढ़ती आबादी बड़ी चुनौती बन गई है। इनकी संख्या में लगातार इजाफे से मछुआरों और सीफूड कारोबार से जुड़े लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। समस्या से निपटने के लिए सरकार और वैज्ञानिक अब एक अनोखे प्रयोग पर काम कर रहे हैं। इसके तहत किसी जहरीले रसायन या बड़ी मशीन के बजाय समुद्र में ऑक्टोपस की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
अटलांटिक से इटली तक कैसे पहुंचा ब्लू क्रैब
ब्लू क्रैब मूल रूप से अटलांटिक महासागर में पाई जाने वाली प्रजाति है। माना जाता है कि कई दशक पहले जहाजों में मौजूद पानी के जरिए यह प्रजाति इटली के समुद्री क्षेत्रों तक पहुंची। यहां का अनुकूल वातावरण मिलने के बाद इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगी। इन केकड़ों का कोई प्रभावी प्राकृतिक शिकारी नहीं होने के कारण इनका फैलाव लगातार जारी रहा। करीब दो पाउंड वजन वाले ये केकड़े मजबूत पंजों से मछली पकड़ने वाले जाल तक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मछलियों और शेलफिश पर पड़ रहा सीधा असर
ब्लू क्रैब समुद्र में मौजूद क्लैम, मसल्स और दूसरी शेलफिश को बड़ी मात्रा में खाता है। इसका सीधा असर मछुआरों और एक्वाकल्चर कारोबार पर पड़ा है। मछुआरों और किसानों के संगठन कोल्डिरेटी के मुताबिक, इस समस्या के कारण अब तक लगभग 200 मिलियन यूरो का नुकसान हो चुका है। कुछ प्रभावित क्षेत्रों में क्लैम का उत्पादन करीब 70 प्रतिशत तक घट गया है।
वैज्ञानिकों ने शुरू किया ऑक्टो-ब्लू प्रोजेक्ट
समस्या का प्राकृतिक समाधान तलाशने के लिए बोलोग्ना यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक ऑक्टो-ब्लू प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसके तहत एड्रियाटिक तट के रिकसिओन और सेसेनाटिको इलाकों में करीब 1.30 लाख छोटे ऑक्टोपस समुद्र में छोड़े गए हैं। ये क्षेत्र ब्लू क्रैब के बढ़ते प्रकोप से काफी प्रभावित बताए जाते हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ऑक्टोपस प्राकृतिक शिकारी के रूप में केकड़ों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करेंगे।
ऑक्टोपस बनेंगे ब्लू क्रैब के प्राकृतिक दुश्मन
प्रोजेक्ट के तहत छोड़े गए ऑक्टोपस प्रयोगशाला में तैयार किए गए हैं। जब वे कुछ मिलीमीटर के थे, तभी उन्हें समुद्र में छोड़ा गया। उनके लिए पानी के भीतर कृत्रिम ठिकाने भी बनाए गए हैं, ताकि शुरुआती दौर में उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके। वैज्ञानिकों के अनुसार ऑक्टोपस स्वाभाविक रूप से केकड़े जैसी क्रस्टेशियन प्रजातियों का शिकार करते हैं। अनुमान है कि बड़ा होने के बाद एक ऑक्टोपस प्रतिदिन चार तक ब्लू क्रैब खा सकता है।
99 प्रतिशत तक हो सकती है बेबी ऑक्टोपस की मौत
इस प्रयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऑक्टोपस की शुरुआती अवस्था में होने वाली भारी मृत्यु दर है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बेबी ऑक्टोपस की मृत्यु दर करीब 99 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बचे हुए ऑक्टोपस आगे चलकर ब्लू क्रैब की आबादी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। एक मादा ब्लू क्रैब 15 से 20 लाख तक अंडे दे सकती है, इसलिए इसकी संख्या नियंत्रित करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
पो नदी तक पहुंच चुके हैं खतरनाक केकड़े
ब्लू क्रैब का विस्तार अब समुद्री इलाकों तक सीमित नहीं है। ये इटली की सबसे लंबी नदी पो में भी पहुंच चुके हैं। नदी के मुहाने से करीब 100 मील दूर गुस्टाला के पास इन केकड़ों को पकड़ा गया है। वैज्ञानिकों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए चिंताजनक है क्योंकि यूरोप में मीठे पानी के क्षेत्र में ब्लू क्रैब के इतनी दूर तक पहुंचने का यह बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
ज्यादा संख्या होने पर नए इलाकों में बढ़ते हैं
फेरारा यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक अन्ना गविओली के अनुसार, पो नदी में ब्लू क्रैब का इतनी दूर तक पहुंचना असाधारण घटना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी इलाके में इनकी संख्या बहुत ज्यादा हो जाती है, तो ये भोजन और नए ठिकानों की तलाश में दूसरे क्षेत्रों की ओर बढ़ने लगते हैं। इनके बीच आपसी शिकार की प्रवृत्ति भी देखी जाती है, जिसमें बड़े केकड़े छोटे केकड़ों को खा सकते हैं।
सरकार खाने के जरिए भी आबादी घटाने में जुटी
इटली सरकार ब्लू क्रैब को भोजन के रूप में इस्तेमाल करने को भी बढ़ावा दे रही है। कई सुपरमार्केट में इसकी बिक्री शुरू हो चुकी है और रेस्टोरेंट में इससे सलाद, पास्ता समेत अलग-अलग व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर बढ़ चुकी आबादी के सामने केवल इंसानों द्वारा इसके सेवन से अभी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। ऐसे में वैज्ञानिक प्राकृतिक नियंत्रण के लिए ऑक्टोपस वाले प्रयोग को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
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