Manusmriti Row: मनुस्मृति को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट की वकील नाजिया खान ने शुक्रवार को दावा किया कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। खान ने राहुल गांधी की उस प्रस्तुति पर आपत्ति जताई, जिसमें मनुस्मृति पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी-आरएसएस से जुड़े नेताओं की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था।
बीजेपी नेता ने तस्वीरों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
नाजिया खान का कहना है कि मौजूदा बीजेपी सरकार ने कभी देश के नागरिकों से मनुस्मृति पढ़ने या उसके सिद्धांतों का पालन करने की अपील नहीं की है। ऐसे में उनका सवाल है कि इस प्राचीन ग्रंथ पर चर्चा करते समय प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री समेत बीजेपी नेताओं की तस्वीरों को दिखाने का औचित्य क्या था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुद्दे पर आलोचना करना अलग बात है, लेकिन किसी ग्रंथ से जुड़े विषय को मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व के साथ जोड़ने के लिए ठोस आधार भी होना चाहिए।
चुनिंदा अंश पेश करने का लगाया आरोप
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने मनुस्मृति के एक खास हिस्से या अध्याय का उल्लेख करते हुए उसकी ऐसी व्याख्या की, जिससे पूरे ग्रंथ के प्रति नकारात्मक धारणा बन सकती है। उनका तर्क है कि किसी ऐतिहासिक ग्रंथ का आकलन उसके व्यापक संदर्भ को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। खान के मुताबिक, चुनिंदा अंशों को अलग करके प्रस्तुत करने से लोगों के बीच विषय को लेकर अधूरी या भ्रामक समझ पैदा होने की आशंका रहती है।
मोहन भागवत समेत अन्य नेताओं का भी जिक्र
नाजिया खान ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और अन्य प्रमुख चेहरों की तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि राहुल गांधी की प्रस्तुति में बीजेपी और आरएसएस से जुड़े नेताओं की तस्वीरों को मनुस्मृति के मुद्दे के साथ जोड़कर एक विशेष राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया गया। खान के अनुसार, यदि किसी नेता या संगठन पर कोई सीधा आरोप लगाया जाता है तो उसके समर्थन में स्पष्ट तथ्य और संदर्भ सामने रखे जाने चाहिए।
शिकायत के बाद विवाद ने लिया कानूनी रूप
नाजिया खान द्वारा शिकायत दर्ज कराने के दावे के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर संभावित कानूनी प्रक्रिया से भी जुड़ गया है। हालांकि शिकायत किस प्राधिकरण के समक्ष की गई, उसमें किन कानूनी प्रावधानों का उल्लेख है और संबंधित संस्था ने उस पर क्या कार्रवाई की है, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। शिकायत दर्ज होना अपने आप में किसी आरोप के साबित होने का प्रमाण नहीं माना जाता। आगे की स्थिति संबंधित प्राधिकरण की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
मनुस्मृति फिर बनी राजनीतिक बहस का केंद्र
मनुस्मृति भारत में लंबे समय से सामाजिक व्यवस्था, जाति, समानता, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर होने वाली वैचारिक बहस का हिस्सा रही है। अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूह इसे अपने-अपने दृष्टिकोण से देखते हैं। राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद बीजेपी नेता की प्रतिक्रिया ने इस पुराने वैचारिक विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच बढ़ सकती है बयानबाजी
एक तरफ विपक्षी नेता मनुस्मृति के कुछ प्रावधानों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, वहीं बीजेपी नेताओं का तर्क है कि किसी प्राचीन ग्रंथ को केवल चुनिंदा अंशों के आधार पर परिभाषित करना उचित नहीं है। इसी वैचारिक मतभेद के कारण दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो सकती है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इस शिकायत और बीजेपी नेता के आरोपों पर प्रतिक्रिया आने की संभावना बनी हुई है।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया पर रहेगी नजर
अब इस विवाद में राहुल गांधी और कांग्रेस की अगली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही नाजिया खान की शिकायत पर संबंधित प्राधिकरण का रुख भी इस मामले की दिशा तय कर सकता है। यदि शिकायत पर औपचारिक जांच या कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ती है तो विवाद को नया आयाम मिल सकता है। फिलहाल मनुस्मृति को लेकर शुरू हुई यह बहस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ वैचारिक और कानूनी चर्चा का विषय बनी हुई है।
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