Abhijeet Dipke: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक और ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का प्रमुख चेहरा अभिजीत दीपके ने शनिवार को सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि कुछ सरकारी स्कूलों में बच्चों को एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री खिलाई जा रही है। हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और उन्होंने संबंधित स्कूलों या स्थानों के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए हैं।
अधिकारियों से पूछा तीखा सवाल
अभिजीत दीपके ने अपने पोस्ट के जरिए सत्ता और प्रशासन में बैठे अधिकारियों से सवाल किया कि क्या वे अपने बच्चों को भी वही भोजन खिलाने के लिए तैयार होंगे, जो कथित तौर पर सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिया जा रहा है। उन्होंने स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और भोजन की गुणवत्ता को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की।
FIR की धमकी के बावजूद अभियान जारी
दीपके ने कहा कि अगर सरकारी स्कूलों से जुड़ी कथित कमियों को उजागर करने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है, तो भी वह अपना अभियान बंद नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाना है। #SchoolThikKaro के साथ किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा कि कानूनी कार्रवाई की धमकी के बावजूद सच सामने लाने का प्रयास जारी रहेगा।
सरकारी स्कूलों का दौरा कर रहे दीपके
अभिजीत दीपके अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत अलग-अलग सरकारी स्कूलों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वह स्कूलों के बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक व्यवस्था और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित अपने पैतृक गांव से की थी।
गांव के स्कूल में पहुंचा पहला कंप्यूटर
इस महीने की शुरुआत में दीपके ने दावा किया था कि उनके पैतृक गांव के सरकारी स्कूल को पहला कंप्यूटर सिस्टम मिला है। X पर वीडियो साझा करते हुए उन्होंने इसे बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि जब सरकार अपेक्षित तरीके से काम नहीं करती, तब आम लोगों को आगे आकर बदलाव की कोशिश करनी चाहिए।
छात्रों को मिलीं स्कूल की बेंच
दीपके ने अपने गांव के सरकारी स्कूल में छात्रों को बेंच उपलब्ध कराए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने इस उपलब्धि को अपनी जिंदगी के सबसे खुशी भरे पलों में से एक बताया। उनका कहना है कि छोटे स्तर पर किए गए ऐसे प्रयास भी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
महाराष्ट्र के स्कूलों की बदहाल सुविधाओं पर सवाल
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान दीपके ने महाराष्ट्र के विभिन्न सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं। इनमें टूटे हुए शौचालय, पीने के पानी की कमी और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषय शामिल हैं। वह लगातार सरकार से स्कूलों की सुविधाओं को बेहतर बनाने और बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर शिक्षा का माहौल देने की मांग कर रहे हैं।
मंत्रियों और अधिकारियों से भी पूछ चुके हैं सवाल
दीपके बार-बार यह सवाल उठाते रहे हैं कि मंत्री और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं कराते। उनका तर्क है कि यदि सरकारी स्कूलों की शिक्षा और सुविधाएं बेहतर हैं, तो प्रभावशाली लोगों के बच्चे भी वहां पढ़ने चाहिए। उन्होंने स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए PM CARES Fund के इस्तेमाल की मांग भी उठाई है।
5 सितंबर को मार्च की घोषणा
दीपके के नेतृत्व वाली CJP ने 5 सितंबर को शांतिपूर्ण मार्च की घोषणा की है। संगठन के अनुसार, केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद एक महीने के विराम के पश्चात लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से संगठित करने की गतिविधियां दोबारा शुरू की जाएंगी। CJP छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और पिछले प्रदर्शनों के दौरान कथित पैलेट तथा गोलीबारी की घटनाओं की जांच की मांग कर रही है।
शिक्षक दिवस पर परिवार करेंगे मार्च का नेतृत्व
CJP के मुताबिक 5 सितंबर, यानी शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रस्तावित मार्च में उन छात्रों के परिवार शामिल होंगे, जिनके बारे में संगठन का दावा है कि NEET परीक्षा रद्द होने और बाद में दोबारा परीक्षा होने के घटनाक्रम के बाद उन्होंने आत्महत्या की। इसके अलावा जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का सामना करने वाले लोग भी मार्च में शामिल होंगे। संगठन ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताते हुए अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने की बात कही है।
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