Kiren Rijiju News : अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान का मामला सामने आया है। घटना को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी राजनीतिक दल, संगठन या सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और आलोचना करने का अधिकार सभी को है, लेकिन भारत और उसके राष्ट्रीय ध्वज का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
किरेन रिजिजू ने तिरंगे के अपमान पर जताई नाराजगी
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को हुई घटना की निंदा करते हुए कहा कि विरोध करने का अधिकार लोकतंत्र का हिस्सा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान भारत या तिरंगे के प्रति अपमानजनक व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रिजिजू ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि देश और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर दी कड़ी चेतावनी
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना से संबंधित एक वीडियो साझा किया। पोस्ट में उन्होंने कहा कि लोगों को RSS, BJP या केंद्र सरकार की आलोचना करने की पूरी आजादी है। लेकिन उन्होंने साथ ही अपील की कि राजनीतिक या वैचारिक विरोध को देश के अपमान में नहीं बदला जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज और देश का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
‘सरकार की आलोचना करें, लेकिन देश का अपमान नहीं’
केंद्रीय मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सरकार या किसी संगठन के खिलाफ आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, देश और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि RSS, BJP अथवा सरकार की आलोचना करने की स्वतंत्रता है, लेकिन भारत को अपशब्द कहना या तिरंगे का अपमान करना उचित नहीं है।
मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध करने पहुंचे थे प्रदर्शनकारी
जानकारी के मुताबिक, RSS प्रमुख मोहन भागवत न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के बाहर कुछ प्रदर्शनकारी विरोध जताने के लिए एकत्र हुए। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के हाथों में विभिन्न प्रकार के बैनर और पोस्टर मौजूद थे। वे मोहन भागवत के कार्यक्रम के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों पर भारत विरोधी नारे लगाने का आरोप
बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में SFJ से जुड़े खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारी भी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए और कथित तौर पर भारत विरोधी नारेबाजी भी की। इसी प्रदर्शन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान का मामला सामने आया, जिसके बाद भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई।
लोकतांत्रिक विरोध और राष्ट्रीय सम्मान के बीच बहस
इस घटना ने विदेशों में भारतीय राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों के विरोध तथा राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है। एक ओर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति को अधिकार माना जाता है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय ध्वज और देश के सम्मान से जुड़े विषयों को लेकर संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है।
घटना पर आगे की कार्रवाई पर नजर
मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर सामने आए इस मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल घटना से जुड़े वीडियो और प्रदर्शन के दौरान हुई गतिविधियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर नजर बनी हुई है।
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