Vijay Shah Case: कर्नल सोफिया कुरैशी पर कथित विवादित टिप्पणी से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह को राज्य सरकार और राजभवन की ओर से राहत मिली है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं देने से संबंधित राज्य कैबिनेट के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद संबंधित फाइल सरकार को वापस भेज दी गई है। अब राज्य सरकार और विशेष जांच दल यानी SIT इस निर्णय की जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखेंगे।
देर रात राज्यपाल के सामने रखी गई फाइल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार देर रात विजय शाह से संबंधित फाइल राज्यपाल मंगुभाई पटेल के समक्ष पेश की गई। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की। इसके बाद राज्यपाल ने मामले से जुड़ी फाइल का परीक्षण किया और कैबिनेट की उस सिफारिश पर अपनी सहमति दे दी, जिसमें विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी।
SIT ने जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपी
इस पूरे विवाद की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल कर रहा था। सोमवार को शीर्ष अदालत में हुई सुनवाई के दौरान SIT ने जानकारी दी कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट भी सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की जा चुकी है। अब अभियोजन की अनुमति से जुड़े निर्णय के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।
कैबिनेट ने अभियोजन मंजूरी के खिलाफ लिया फैसला
मध्य प्रदेश सरकार ने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने का निर्णय लिया था। इसके बाद कैबिनेट की अनुशंसा राज्यपाल के पास भेजी गई थी। राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद सरकार का निर्णय अब औपचारिक रूप से आगे बढ़ गया है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि विवादित बयान के बाद विजय शाह ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।
अब सुप्रीम कोर्ट को दी जाएगी फैसले की जानकारी
राज्यपाल के निर्णय के बाद सरकार और SIT की ओर से इस घटनाक्रम की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी जाएगी। शीर्ष अदालत पहले यह स्पष्ट कर चुकी है कि अभियोजन स्वीकृति पर सक्षम प्राधिकारी को निर्णय लेने का अवसर दिया जाना चाहिए। ऐसे में अब अदालत जांच रिपोर्ट और सरकार के फैसले को ध्यान में रखते हुए मामले की अगली दिशा पर विचार कर सकती है।
अभी मामले को पूरी तरह खत्म मानना जल्दबाजी
राज्यपाल द्वारा अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने से विजय शाह को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट की ओर से क्लीन चिट मानना सही नहीं होगा। अभियोजन स्वीकृति का निर्णय कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके बाद भी मामले से जुड़े अन्य न्यायिक पहलुओं पर अदालत में सुनवाई हो सकती है।
मंजूरी नहीं मिलने पर क्लोजर रिपोर्ट संभव
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान यह सवाल भी सामने आया था कि यदि अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिलती है तो SIT का अगला कदम क्या होगा। जांच दल की ओर से बताया गया कि ऐसी स्थिति में संबंधित अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा सकती है। हालांकि, क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद उसे अदालत द्वारा स्वीकार किया जाना अलग कानूनी प्रक्रिया है। अंतिम स्थिति न्यायिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्या है विजय शाह और कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद?
यह मामला मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी से जुड़ा है। बयान सामने आने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत के निर्देश पर SIT का गठन किया गया। जांच दल ने बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित परिस्थितियों की जांच पूरी की।
राजनीतिक स्तर पर भी विजय शाह को राहत
राज्यपाल की सहमति के बाद फिलहाल विजय शाह के खिलाफ अभियोजन आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में बड़ी बाधा सामने आई है। इससे उन्हें राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर राहत मिली है। हालांकि, सरकार के निर्णय को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जाने की संभावना बनी हुई है। इस फैसले के राजनीतिक प्रभाव भी आने वाले दिनों में देखने को मिल सकते हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर नजर
फिलहाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्यपाल के निर्णय और SIT की जांच रिपोर्ट का रखा जाना है। अभियोजन की अनुमति नहीं मिलने के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होती है या अदालत मामले में कोई अन्य दिशा तय करती है, यह आगे स्पष्ट होगा। इसलिए अभी मामले को पूरी तरह समाप्त मानना उचित नहीं है।
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