त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। सरकारी उपायों के बाद मिल-द्वार कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि थोक भाव भी नीचे आए हैं। खुदरा कीमतों में अभी सीमित कमी हुई है। सरकार ने स्टॉक सीमा और निगरानी जैसे कदम उठाए हैं।
त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। सरकारी उपायों के बाद मिल-द्वार कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि थोक भाव भी नीचे आए हैं। खुदरा कीमतों में अभी सीमित कमी हुई है। सरकार ने स्टॉक सीमा और निगरानी जैसे कदम उठाए हैं।

Sugar Price Drop : केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए सख्त कदमों और चीनी आयात से जुड़े फैसलों का असर अब घरेलू बाजार में दिखाई देने लगा है। बीते एक सप्ताह में देशभर में चीनी की औसत खुदरा कीमत में 3.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक सप्ताह पहले चीनी की औसत कीमत 65.08 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब घटकर 62.57 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है। हालांकि, कीमतों में यह कमी उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है, लेकिन पिछले महीने की तुलना में चीनी अभी भी महंगी है।


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 49.33 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसके मुकाबले मौजूदा कीमत लगभग 27 प्रतिशत अधिक बनी हुई है। यानी हालिया गिरावट के बावजूद उपभोक्ताओं को अभी चीनी के लिए पहले की तुलना में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। सरकार के हालिया हस्तक्षेप के बाद बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश तेज हुई है।

खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक मंडियों में भी चीनी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2 सितंबर को चीनी का औसत थोक मूल्य घटकर 57.62 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। एक सप्ताह पहले यही कीमत 60.39 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह थोक बाजार में भी कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है। माना जा रहा है कि थोक स्तर पर आई यह राहत धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंच सकती है।
हालांकि थोक बाजार में कीमत घटने के बावजूद इसका तत्काल पूरा लाभ उपभोक्ताओं को खुदरा दुकानों पर नहीं मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, थोक कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं। इसका प्रमुख कारण व्यापारियों के पास पहले से मौजूद महंगा स्टॉक बताया जा रहा है।
आमतौर पर एक सामान्य खुदरा दुकानदार के पास चीनी की 50-50 किलोग्राम वाली करीब 10 से 15 बोरियां स्टॉक में रहती हैं। व्यापारियों ने यह माल पहले की ऊंची कीमतों पर खरीदा हुआ है। ऐसे में वे इसे तुरंत कम कीमत पर बेचकर नुकसान उठाने के बजाय पुरानी कीमतों पर ही बेचने की कोशिश करते हैं। जैसे ही पुराना स्टॉक खत्म होगा और दुकानदार कम कीमत पर नया माल खरीदेंगे, खुदरा बाजार में कीमतों में वास्तविक गिरावट दिखाई देने की उम्मीद है।

कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने देश में 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दी है। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और आपूर्ति को मजबूत करना है। इसके साथ ही सरकार ने थोक खरीदारों, बड़े उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए चीनी की स्टॉक लिमिट से जुड़े नियम भी सख्त किए हैं।
सरकार का प्रयास है कि बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध रहे और व्यापारी इसकी जमाखोरी करके कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी न कर सकें। स्टॉक लिमिट के नियमों को कड़ा करने के पीछे भी यही उद्देश्य बताया गया है। केंद्र का मानना है कि देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध होने के बावजूद कुछ मिलों की ओर से कीमतें बढ़ाई गई हैं।
मार्केटिंग वर्ष 2025-26 के लिए देश के चीनी उत्पादन का अनुमान भी कम किया गया है। पहले 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, जिसे अब घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। हालांकि, देश की सालाना चीनी मांग लगभग 280 से 285 लाख टन के आसपास है। ऐसे में उत्पादन अनुमान घटने के बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बने रहने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में आयात, नया स्टॉक और सरकारी सख्ती चीनी की खुदरा कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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