Swine Flu Ayurveda : स्वाइन फ्लू एक श्वसन संबंधी वायरल बीमारी है, जो इन्फ्लुएंजा A (H1N1) वायरस के संक्रमण से होती है। इसके लक्षण सामान्य फ्लू से काफी मिलते-जुलते हो सकते हैं। मरीज को बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान की शिकायत हो सकती है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि H1N1 से संक्रमित हर व्यक्ति को बुखार आए। कुछ मामलों में लक्षण हल्के भी रह सकते हैं।
आयुर्वेद में इलाज का क्या है तरीका?
आशा आयुर्वेद की डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, आयुर्वेद में किसी बीमारी के उपचार के दौरान केवल लक्षणों को नियंत्रित करने के बजाय शरीर की प्राकृतिक क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है। खान-पान, नींद, तनाव और जीवनशैली को भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि, H1N1 एक वायरल संक्रमण है और गंभीर स्थिति में केवल घरेलू या आयुर्वेदिक उपायों पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
हर्बल चीजों का इस्तेमाल सावधानी से करें
कुछ जड़ी-बूटियों और खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से इम्युनिटी और सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए किया जाता है। इन्हें बीमारी के दौरान सहायक उपाय के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, इनसे H1N1 वायरस खत्म होने या स्वाइन फ्लू ठीक होने का पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए इन्हें डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
गिलोय को लेकर क्या कहता है आयुर्वेद?
गिलोय का इस्तेमाल आयुर्वेद में पारंपरिक रूप से बुखार और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है। इसे इम्युनिटी को सपोर्ट करने वाली जड़ी-बूटी के तौर पर भी जाना जाता है। हालांकि, स्वाइन फ्लू के इलाज में गिलोय की प्रभावशीलता को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसलिए इसका सेवन भी विशेषज्ञ की सलाह से करना बेहतर है।
तुलसी से गले की परेशानी में मिल सकती है राहत
तुलसी का इस्तेमाल भारतीय घरों में लंबे समय से सर्दी-जुकाम और गले से जुड़ी परेशानियों के लिए किया जाता रहा है। फ्लू के दौरान गले में खराश या असहजता होने पर तुलसी का सेवन पारंपरिक रूप से किया जाता है। लेकिन इसे H1N1 का इलाज नहीं माना जा सकता। संक्रमण गंभीर होने पर डॉक्टर से परामर्श जरूरी है।
हल्दी और अदरक को डाइट में कर सकते हैं शामिल
हल्दी में ऐसे यौगिक पाए जाते हैं जिनमें सूजन कम करने वाले गुणों की चर्चा की जाती है। वहीं अदरक का इस्तेमाल भी पारंपरिक रूप से गले की परेशानी और पाचन संबंधी समस्याओं में किया जाता रहा है। संतुलित डाइट के हिस्से के तौर पर हल्दी, अदरक, लहसुन और विटामिन-C से भरपूर खट्टे फलों को शामिल किया जा सकता है।
शरीर को हाइड्रेट रखना है बेहद जरूरी
बीमारी के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना जरूरी है। गुनगुना पानी पीने से शरीर में पानी की कमी से बचने में मदद मिल सकती है। इसके साथ पौष्टिक और संतुलित भोजन करें, पर्याप्त आराम लें और रोजाना एक नियमित दिनचर्या बनाए रखने की कोशिश करें। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना भी बेहतर है।
तनाव कम करने और नींद पर दें ध्यान
बीमारी के दौरान शरीर को आराम और पर्याप्त नींद की जरूरत होती है। मानसिक तनाव कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार 5 से 10 मिनट ध्यान किया जा सकता है। यदि स्वास्थ्य स्थिति इसकी अनुमति देती है, तो विशेषज्ञ की सलाह से हल्की योग या सांस संबंधी एक्सरसाइज भी की जा सकती हैं। किसी भी गतिविधि से परेशानी बढ़े तो उसे तुरंत रोक देना चाहिए।
पंचकर्म कराने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी
आयुर्वेद में पंचकर्म को शरीर की शुद्धि और स्वास्थ्य सुधार से जुड़ी प्रक्रियाओं के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। सांस संबंधी कुछ परेशानियों में भी आयुर्वेदिक प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। लेकिन सक्रिय H1N1 संक्रमण के दौरान पंचकर्म या किसी विशेष प्रक्रिया को बिना योग्य डॉक्टर की सलाह के नहीं करवाना चाहिए।
आयुर्वेद को मेडिकल इलाज का विकल्प न समझें
स्वाइन फ्लू एक वायरल संक्रमण है और गंभीर मामलों में चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता हो सकती है। सांस लेने में परेशानी, लगातार बिगड़ते लक्षण, अत्यधिक कमजोरी या अन्य गंभीर संकेत दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। गिलोय, तुलसी, हल्दी या अदरक जैसे उपाय सहायक हो सकते हैं, लेकिन इनके जरिए H1N1 संक्रमण ठीक होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए डॉक्टर के उपचार को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।
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