CJP Split: अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को अपने गठन के कुछ ही समय बाद पहली बड़ी बगावत का सामना करना पड़ा है। CJP से जुड़े रहे मनीष ब्रह्मभट्ट ने दिपके से अलग होकर कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक (CJP-D) नाम से एक नया राजनीतिक मंच शुरू करने का ऐलान किया है। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मौजूदा नेतृत्व पर आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों और स्वयंसेवकों को नजरअंदाज करने का गंभीर आरोप लगाया है।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप
ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि युवाओं और स्वयंसेवकों के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन अब अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। उनका कहना है कि CJP को एक व्यापक राष्ट्रीय मंच बनाने के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के नेतृत्व में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ गया है, जो पहले आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े रहे हैं और जिनकी प्राथमिकता केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विरोध करना है।
CJP-D बनाने के पीछे बताई आंदोलन की मूल भावना
समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को दिल्ली में CJP-D के गठन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति या टीम का नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों का था। ब्रह्मभट्ट के मुताबिक, इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए प्रदर्शनकारियों और स्वयंसेवकों ने मेहनत की, लेकिन सफलता मिलने के बाद उन्हें निर्णय प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
12 सदस्यीय टीम को लेकर उठाए सवाल
ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद अभिजीत दिपके और उनके सहयोगियों ने अपने स्तर पर 12 सदस्यीय टीम का गठन कर लिया। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया में जंतर-मंतर के प्रदर्शन में सक्रिय रहे किसी प्रमुख स्वयंसेवक या प्रदर्शनकारी से सलाह नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम के जरिए आंदोलन से जुड़े लोगों की राय भी नहीं मांगी गई।
AAP नेताओं और निजी परिचितों को शामिल करने का आरोप
मनीष ब्रह्मभट्ट ने दावा किया कि नई टीम में आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों के अलावा एक महिला मित्र और कॉलेज के दोस्तों को भी शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी मांग थी कि CJP की राष्ट्रीय टीम में प्रत्येक राज्य से प्रदर्शनकारियों और स्वयंसेवकों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। उनके अनुसार, चयन प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए थी और किसी हाईकमान या एक व्यक्ति के मनमाने फैसले पर आधारित नहीं होनी चाहिए थी।
अगस्त में दिपके के घर के बाहर हुआ था प्रदर्शन
रिपोर्टों के मुताबिक, अगस्त की शुरुआत में ब्रह्मभट्ट को जानकारी मिली थी कि CJP की कोर टीम अभिजीत दिपके के आवास पर बैठक कर रही है। इसके बाद वह गुजरात से छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे थे। ब्रह्मभट्ट और उनके सहयोगी राहुल पांड्या ने दिपके के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। दोनों का आरोप था कि जंतर-मंतर के आंदोलनों में सक्रिय स्वयंसेवकों को महत्वपूर्ण चर्चाओं से दूर रखा गया।
प्रदर्शन के दौरान दोनों की तबीयत बिगड़ी
विरोध प्रदर्शन के दौरान मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद मीडिया रिपोर्टों में ब्रह्मभट्ट को CJP कार्यकर्ता के तौर पर बताया गया था। अब उनके अलग मंच बनाने के ऐलान के बाद CJP के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
दिपके और CJP की ओर से अभी प्रतिक्रिया नहीं
ब्रह्मभट्ट के लगाए गए आरोपों पर अभिजीत दिपके या कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। CJP नेतृत्व की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद विवाद के दूसरे पक्ष की स्थिति भी स्पष्ट हो सकती है।
16 मई को दिपके ने शुरू की थी CJP
अभिजीत दिपके ने 16 मई को कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में की थी। यह पहल मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कुछ कथित टिप्पणियों के बाद पैदा हुए आक्रोश के बीच शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में इसे ऑनलाइन मजाक और विरोध के प्रतीक के तौर पर देखा गया था।
ऑनलाइन आंदोलन से युवा मंच तक पहुंची CJP
समय के साथ CJP का दायरा बढ़ता गया और यह युवाओं के एक मंच के रूप में सामने आई। संगठन ने बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं जैसे मुद्दों को उठाया। अब CJP-D के गठन से आंदोलन के भीतर नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक दिशा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
CJP के सामने बढ़ी चुनौती
मनीष ब्रह्मभट्ट के अलग होने से CJP के सामने संगठनात्मक एकता बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। खास तौर पर स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधित्व को लेकर उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि CJP नेतृत्व इन आरोपों का किस तरह जवाब देता है और CJP-D अपने नए राजनीतिक मंच को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।
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