Vinod Tawde UP Visit : उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रभारी बनाए जाने के बाद विनोद तावड़े पहली बार पांच सितंबर को उत्तर प्रदेश के दौरे पर पहुंचेंगे। उनके इस दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तावड़े ने अपने स्वागत को लेकर प्रदेश के पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि उनके स्वागत में किसी तरह के बैनर, पोस्टर या होर्डिंग नहीं लगाए जाएं।
रोड शो से भी किया इनकार
विनोद तावड़े ने अपने यूपी दौरे के दौरान किसी तरह का रोड शो आयोजित करने से भी प्रदेश संगठन के नेताओं को मना किया है। उनका मानना है कि बड़े स्तर पर स्वागत कार्यक्रम और रोड शो से आम लोगों को परेशानी हो सकती है और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। तावड़े ने संगठन के पदाधिकारियों से सादगी के साथ दौरे को पूरा करने पर जोर दिया है। उनके निर्देश से यह संकेत भी माना जा रहा है कि वह संगठनात्मक कामकाज को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
लखनऊ पहुंचते ही संगठन की अहम बैठक
सूत्रों के अनुसार, लखनऊ पहुंचने के बाद विनोद तावड़े पार्टी संगठन की महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेता और संगठन के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हो सकते हैं। बैठक के दौरान आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही संगठन की मौजूदा स्थिति और चुनावी तैयारियों की समीक्षा भी की जाएगी।
बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की रणनीति
बैठक में भाजपा को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। पार्टी पदाधिकारियों के साथ चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने को लेकर भी मंथन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में भाजपा ने चुनावी तैयारियों को पहले से ही गति देना शुरू कर दिया है।
सामाजिक और जातीय समीकरण पर भाजपा का फोकस
उत्तर प्रदेश की सियासत में सामाजिक और जातीय समीकरणों की अहम भूमिका को देखते हुए भाजपा इस दिशा में भी अपनी रणनीति मजबूत कर रही है। पार्टी ने जगदीश ईश्वरभाई पटेल को उत्तर प्रदेश का सह-प्रभारी बनाया है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इस बार संगठन में ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े नेताओं को अधिक जिम्मेदारियां देने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
चुनावी अनुभव के लिए तावड़े पर भरोसा
राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े भाजपा और एनडीए के लिए कई महत्वपूर्ण चुनावी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। संगठन और चुनाव दोनों क्षेत्रों में लंबे अनुभव के चलते पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है। सहयोगी दलों के नेताओं के साथ उनके बेहतर संबंधों को भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
एबीवीपी से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से शुरू हुआ। वह संगठन में महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 1995 में उन्हें भाजपा महाराष्ट्र का महासचिव बनाया गया। उस समय महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना गठबंधन की सरकार बनी थी। इसके बाद 2002 में उन्हें दोबारा महाराष्ट्र भाजपा का महासचिव बनाया गया।
संगठन विस्तार में निभाई अहम भूमिका
महाराष्ट्र भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने के दौरान तावड़े ने बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करने और भाजपा की विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए काम किया। यही संगठनात्मक अनुभव अब उत्तर प्रदेश में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
सबसे कम उम्र में मुंबई भाजपा अध्यक्ष बने
वर्ष 1999 में विनोद तावड़े भाजपा की मुंबई इकाई के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने थे। उनके कार्यकाल के दौरान मुंबई महानगरपालिका में भाजपा के पार्षदों की संख्या बढ़ी और पार्टी का संगठन मजबूत हुआ। उन्होंने मुंबई के विकास से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। बताया जाता है कि उनके प्रयासों से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में मुंबई के लिए बड़े बजट का प्रावधान हुआ, जिससे शहर की कई विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
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