Bhopal Guest Teachers Protest: मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षक एक बार फिर अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने जा रहे हैं। शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर 2026 को प्रदेशभर से हजारों अतिथि शिक्षक भोपाल के शाहजहानी पार्क में एकत्र होने का ऐलान कर चुके हैं। अतिथि शिक्षक समन्वय समिति का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद शिक्षकों को रोजगार की स्थिरता और भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति का इंतजार है।
वार्षिक अनुबंध और रोजगार सुरक्षा की मांग
अतिथि शिक्षक संगठन के अनुसार प्रदर्शन के दौरान वार्षिक अनुबंध, शैक्षणिक सत्र के बीच बेरोजगार नहीं किए जाने और स्थायी रोजगार की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। संगठन का कहना है कि अतिथि शिक्षक वर्षों से सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरी की स्थिति अभी भी अस्थायी बनी हुई है। ऐसे में सरकार से रोजगार को सुरक्षित करने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की जा रही है।
2023 की घोषणाओं को लागू करने की मांग
अतिथि शिक्षक संगठन ने वर्ष 2023 में भोपाल में आयोजित अतिथि शिक्षक पंचायत की घोषणाओं का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के मुताबिक, 2 सितंबर 2023 को लाल परेड मैदान में आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से अतिथि शिक्षकों के हित में कई घोषणाएं की गई थीं। इनमें वार्षिक अनुबंध, बीच सत्र में बेरोजगार नहीं करने और स्थायी रोजगार से जुड़ी बातें शामिल थीं।
नियमितीकरण और बोनस अंकों का मुद्दा
संगठन का दावा है कि 2023 की पंचायत में गुरुजियों की तर्ज पर अतिथि शिक्षकों के लिए नीति बनाने और उन्हें नियमित करने की बात भी कही गई थी। इसके अलावा सीधी शिक्षक भर्ती में अतिथि शिक्षकों को बोनस अंक देकर स्थायी रोजगार का अवसर देने की घोषणा का भी उल्लेख किया जा रहा है। संगठन अब इन्हीं मांगों और घोषणाओं को लागू कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में है।
सरकार से घोषणाओं के क्रियान्वयन पर सवाल
अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार का कहना है कि यदि सरकार ने शिक्षकों के हित में घोषणाएं की थीं, तो उनके क्रियान्वयन की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। संगठन का सवाल है कि वर्षों से स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अब तक स्थायी नीति क्यों नहीं बनाई गई। हालांकि, घोषणाओं और उनके क्रियान्वयन को लेकर संगठन की ओर से किए गए दावों पर सरकार की आधिकारिक स्थिति अलग हो सकती है।
कई नेताओं के समर्थन का संगठन ने किया दावा
सुनील सिंह परिहार ने दावा किया कि अतिथि शिक्षकों को स्थायी करने के मुद्दे पर कई वरिष्ठ नेताओं की ओर से समर्थन की बात कही जा चुकी है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का नाम लेते हुए कहा कि अतिथि शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की जरूरत पर समर्थन मिला है। संगठन का तर्क है कि सरकार को अब इस मुद्दे पर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
प्रदेश में 70 हजार अतिथि शिक्षक होने का दावा
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने मध्य प्रदेश में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों के कार्यरत होने का दावा किया है। उनके मुताबिक, यदि सरकार पुरानी घोषणाओं को लागू करती है और स्थायी रोजगार की नीति बनाती है, तो बड़ी संख्या में शिक्षकों को राहत मिल सकती है। संगठन का जोर इस बात पर है कि वर्षों के अनुभव और सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए अतिथि शिक्षकों के लिए रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
7 हजार से ज्यादा नई नियुक्तियों पर संगठन की प्रतिक्रिया
स्कूल शिक्षा विभाग में 7 हजार से अधिक शिक्षकों की प्रस्तावित नई नियुक्तियों को लेकर भी अतिथि शिक्षक संगठन ने अपनी बात रखी है। सुनील सिंह परिहार का दावा है कि इन नियुक्तियों का जिलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों पर व्यापक प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, नई नियुक्तियों का वास्तविक असर संबंधित स्कूलों, पदों और विभागीय व्यवस्था के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
महिला भागीदारी बढ़ाने के लिए संगठन में बदलाव
अतिथि शिक्षक समन्वय समिति ने संगठन को मजबूत करने के लिए महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाया है। संगठन की ओर से स्वाति श्रीवास्तव को महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी दी गई है। समिति का कहना है कि संगठनात्मक पुनर्गठन के जरिए महिला अतिथि शिक्षकों की भागीदारी बढ़ाने और उनकी आवाज को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदर्शन के बाद सरकार के रुख पर नजर
5 सितंबर को होने वाले प्रदर्शन में अतिथि शिक्षक एक बार फिर अपनी प्रमुख मांगों को सरकार के सामने रखेंगे। वार्षिक अनुबंध, बीच सत्र में रोजगार समाप्त नहीं करने, नियमितीकरण की नीति और सीधी भर्ती में बोनस अंक देने जैसे मुद्दे प्रदर्शन के केंद्र में रहेंगे। अब सभी की नजर इस बात पर है कि भोपाल में होने वाले प्रदर्शन के बाद सरकार अतिथि शिक्षकों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और वर्ष 2023 की घोषणाओं को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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