India China Talk: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की हालिया चीन यात्रा के बाद भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर बातचीत आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के सैन्य कमांडरों की अहम बैठक हो सकती है। यह बैठक पूर्वोत्तर भारत में किसी निर्धारित स्थान पर होने की संभावना है, जहां वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।
अरुणाचल के ताकसिंग क्षेत्र में तनाव के बीच बैठक संभव
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के ताकसिंग इलाके में तनाव की खबरों के बीच भारत और चीन के स्थानीय सैन्य अधिकारियों के बीच बैठक हो सकती है। भारतीय सेना की III कोर, जिसे स्पीयर कोर के नाम से भी जाना जाता है, के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया अपने चीनी समकक्ष और अन्य अधिकारियों के साथ बातचीत कर सकते हैं।
स्पीयर कोर की सीमा क्षेत्र में अहम भूमिका
स्पीयर कोर का मुख्यालय नागालैंड के दीमापुर के पास रंगापहाड़ में स्थित है। यह कोर नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के मध्य तथा पूर्वी हिस्सों में सैन्य अभियानों के लिए जिम्मेदार है। इसके अधिकार क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे कई संवेदनशील क्षेत्र भी आते हैं। ऐसे में संभावित कमांडर स्तर की बैठक को सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्थानीय कमांडरों के बीच पहले भी हुई कई बैठकें
भारत और चीन के स्थानीय सैन्य कमांडरों के बीच पिछले कुछ हफ्तों में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इन बैठकों का उद्देश्य सीमा से जुड़े स्थानीय मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाना और किसी भी तरह की गलतफहमी को बढ़ने से रोकना रहा है। इसी क्रम में भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी इस सप्ताह की शुरुआत में स्पीयर कोर का दौरा किया था।
सेना प्रमुख ने तैयारियों की समीक्षा की
सेना के अनुसार, जनरल धीरज सेठ ने अपने दौरे के दौरान सभी फॉर्मेशनों की ऑपरेशनल तैयारियों और सीमा क्षेत्रों में चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्हें सैन्य क्षमताओं को विकसित करने और युद्धक क्षमता को और मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी दी गई। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब पूर्वोत्तर में सीमा सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
25 अगस्त को डोभाल और वांग यी की मुलाकात
भारत-चीन सीमा वार्ता को आगे बढ़ाने में अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की 25 अगस्त को बीजिंग में हुई मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेता सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के तहत मिले थे। बैठक के दौरान सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
सीमा प्रबंधन में जल्द प्रगति पर बनी सहमति
बैठक के अगले दिन भारत और चीन की ओर से संकेत दिया गया कि दोनों देश सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन के मुद्दों पर जल्द और ठोस प्रगति के लिए बातचीत जारी रखेंगे। इसके अलावा दोनों पक्षों ने पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो नई सैन्य हॉटलाइन स्थापित करने पर भी सहमति जताई है।
नए बैठक स्थल और हॉटलाइन पर तैयारी
प्रस्तावित सैन्य हॉटलाइन लखनऊ और कोलकाता स्थित सेना कमांड मुख्यालयों में स्थापित किए जाने की संभावना है। इसके अलावा उत्तराखंड के जोशीमठ में वरिष्ठ कमांडर स्तर की बातचीत के लिए एक नया बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (BPM) प्वाइंट बनाए जाने की योजना है। इससे दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधा संपर्क और संवाद बेहतर हो सकता है।
तवांग और चुशुल में पहले से मौजूद BPM प्वाइंट
भारत और चीन के बीच सैन्य संवाद के लिए अरुणाचल प्रदेश के तवांग और लद्दाख के चुशुल में पहले से ही बॉर्डर पर्सनल मीटिंग प्वाइंट मौजूद हैं। नए बैठक स्थल और हॉटलाइन स्थापित होने से सीमा पर किसी भी घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच तत्काल संपर्क स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
सितंबर में सीमा-पार नदियों पर भी होगी चर्चा
दोनों देशों ने सितंबर में सीमा-पार नदियों से जुड़े मुद्दों पर बैठक आयोजित करने पर भी सहमति जताई है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के अलावा नदियों से जुड़े विषय भी लंबे समय से बातचीत का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में आगामी बैठकें दोनों देशों के बीच व्यापक सीमा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
BRICS सम्मेलन में जिनपिंग के आने की उम्मीद
इस बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है। यदि जिनपिंग भारत आते हैं, तो दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच मुलाकात की संभावना भी बन सकती है। ऐसे में डोभाल-वांग यी वार्ता के बाद सैन्य और राजनयिक स्तर पर बढ़ता संवाद भारत-चीन संबंधों के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।
सीमा पर तनाव घटाने की दिशा में अहम कदम
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन सैन्य हॉटलाइन, नए BPM प्वाइंट और कमांडर स्तर की बैठकों पर सहमति से संवाद के रास्ते मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में पूर्वोत्तर में प्रस्तावित सैन्य बैठक और सितंबर की अन्य वार्ताओं से यह स्पष्ट हो सकता है कि दोनों देश सीमा पर स्थिरता और तनाव कम करने के लिए किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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