Bhavnagar News: गुजरात के भावनगर शहर में लिव-इन पार्टनर की हत्या के आरोपी फैजल लखानी को शनिवार को पुलिस उसी बस स्टैंड पर लेकर पहुंची, जहां कथित तौर पर उसने वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने यहां अपराध स्थल का रीक्रिएशन कराया। इसी दौरान आरोपी को पुलिसकर्मियों द्वारा सार्वजनिक रूप से डंडों से पीटने का वीडियो सामने आया, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पुलिस की पिटाई का वीडियो
क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान आरोपी को रस्सियों से बांधकर ले जाने और पुलिसकर्मियों द्वारा डंडों से पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और आरोपियों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे जनता में कानून-व्यवस्था को लेकर भरोसा कायम करने की कोशिश बताया है।
फैजल का पहले से रहा है आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस के मुताबिक, आरोपी फैजल लखानी का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ डकैती समेत कई गंभीर आरोप पहले भी दर्ज रहे हैं। बताया गया है कि फैजल और मृतका काजल बरैया पिछले करीब सात वर्षों से फुटपाथ पर लिव-इन पार्टनर के तौर पर रह रहे थे। फैजल कुछ समय पहले ही जेल से बाहर आया था।
रिश्तों को लेकर हुआ विवाद और बढ़ा तनाव
जेल से रिहा होने के बाद फैजल को कथित तौर पर जानकारी मिली कि काजल के संबंध उसके परिचित रवि के साथ हो गए हैं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पुलिस के अनुसार, गुरुवार को फैजल का काजल और रवि के साथ झगड़ा हुआ और मामला देखते ही देखते हिंसक हो गया।
बस स्टैंड पर काजल और रवि पर जानलेवा हमला
आरोप है कि विवाद के दौरान फैजल ने भावनगर बस स्टैंड पर काजल बरैया और रवि पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हुए। काजल को इलाज के लिए शहर के सरकारी सर टी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी।
हत्या के आरोप में फैजल को किया गया गिरफ्तार
घटना के अगले दिन शुक्रवार को नीलम बाग पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फैजल लखानी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू की और वारदात से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी जुटाने के लिए शनिवार को उसे घटनास्थल पर ले जाया गया। इसी दौरान सार्वजनिक पिटाई का वीडियो सामने आया।
पुलिस ने सख्त कार्रवाई को बताया जरूरी
नीलम बाग पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर डी. पी. अनादकट ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि महिला पर हुए हमले की घटना से जुड़े वीडियो के कारण लोगों में पुलिस के प्रति नाराजगी और असंतोष बढ़ा था। उनके मुताबिक, लोगों में यह धारणा बन रही थी कि अपराधियों में कानून का डर नहीं है। पुलिस ने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में सख्त संदेश देने की जरूरत महसूस हुई।
गुजरात हाईकोर्ट के सर्कुलर से बढ़े कानूनी सवाल
हालांकि आरोपी की सार्वजनिक पिटाई पुलिस के लिए कानूनी विवाद का कारण बन सकती है। इससे पहले सूरत में आरोपियों की सार्वजनिक पिटाई से जुड़े मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि राज्य गृह विभाग ने 7 मई को एक सर्कुलर जारी किया है।
पुलिस हिरासत में मारपीट पर है रोक
सर्कुलर के मुताबिक पुलिस हिरासत में आरोपी से सार्वजनिक रूप से उठक-बैठक करवाना, घुटनों के बल चलवाना, लात मारना या डंडे से पीटना प्रतिबंधित है। इस तरह का व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की बात भी सर्कुलर में कही गई है।
सार्वजनिक पिटाई से पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
भावनगर की घटना ने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कानून के दायरे में पुलिस प्रक्रिया के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। हत्या जैसे गंभीर अपराध में आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूरी है, लेकिन हिरासत या सार्वजनिक स्थान पर मारपीट की तस्वीरें पुलिस की जवाबदेही और मानवाधिकार से जुड़े सवाल भी खड़े करती हैं।
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