Saharanpur News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में बनी अवैध मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के बाद अब एक नया मामला चर्चा में है। मस्जिद का मलबा हटाने के दौरान जमीन के नीचे एक कुआं दिखाई दिया। प्रशासन के मुताबिक, मस्जिद का निर्माण इसी कुएं के ऊपर किया गया था। कुआं सामने आने के बाद अब उसके इतिहास और निर्माण से जुड़े कई सवाल उठने लगे हैं।
मलबा हटाते ही दिखी पुरानी संरचना
मस्जिद का मलबा हटाने का काम चल रहा था, तभी जमीन के नीचे कुएं जैसी संरचना दिखाई दी। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया गया था, वहां पहले से ही यह कुआं मौजूद था। हालांकि, कुआं कब बनाया गया था और इसका निर्माण किसने कराया था, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
कुएं के इतिहास को लेकर कई सवाल
कुएं के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल उसके इतिहास को लेकर उठ रहा है। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि यह कुआं कितना पुराना है और मस्जिद बनने से पहले इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाता था। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या कुएं को किसी समय बंद किया गया था और उसके ऊपर बाद में निर्माण किया गया।
एसडीएम ने जांच कराने की बात कही
सहारनपुर सदर के एसडीएम सुबोध कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि मस्जिद कुएं के ऊपर बनी थी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुआं कब बनाया गया और इसे किसने बनवाया था, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच कराने की बात कही गई है।
जांच में सामने आएंगे पुराने तथ्य
एसडीएम के मुताबिक, कुएं से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। प्रशासन उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास करेगा कि इस स्थान का पुराना इतिहास क्या रहा है। जांच के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल कुएं को किया गया कवर
मस्जिद का मलबा हटाए जाने के बाद सामने आए कुएं को प्रशासन ने फिलहाल कवर कर दिया है। इसका उद्देश्य मौके पर सुरक्षा बनाए रखना और संरचना को सुरक्षित रखना बताया जा रहा है। अब प्रशासन की नजर इस बात पर है कि जांच के दौरान कुएं से संबंधित कौन-कौन से पुराने तथ्य सामने आते हैं।
रिकॉर्ड से तलाशा जाएगा कुएं का इतिहास
प्रशासन अब उपलब्ध दस्तावेजों और स्थानीय रिकॉर्ड के जरिए कुएं की पुरानी स्थिति का पता लगाने की कोशिश करेगा। इसके साथ ही यह भी जांच की जा सकती है कि कलेक्ट्रेट परिसर की इस जमीन का पहले किस तरह इस्तेमाल होता था। पुराने नक्शे, राजस्व रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेजों से कुएं की उम्र और स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।
निर्माण से पहले क्या था, जांच से होगा साफ
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कुआं मस्जिद के निर्माण से कितने समय पहले मौजूद था। यह भी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है कि कुएं को बंद करके उसके ऊपर निर्माण किया गया था या निर्माण के दौरान उसकी स्थिति क्या थी। इसलिए इन सभी सवालों का जवाब प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।
प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में कुआं मिलने के बाद अब प्रशासन की जांच पर सभी की नजर है। फिलहाल कुएं को सुरक्षित कर दिया गया है और उसके इतिहास से जुड़े तथ्यों को जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जांच और रिकॉर्ड से मिलने वाली जानकारी के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कुआं कब बना, इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता था और मस्जिद के निर्माण से पहले वहां इसकी वास्तविक स्थिति क्या थी।
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