CGPSC-DMF Scam : छत्तीसगढ़ के चर्चित DMF घोटाले और CGPSC स्कैम से जुड़े मामले में कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। DMF घोटाले के आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा और CGPSC घोटाले के आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। दोनों आरोपियों की पांच दिन की कस्टोडियल रिमांड पूरी होने के बाद शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें स्पेशल कोर्ट में पेश किया था।
ED ने रिमांड बढ़ाने के लिए नहीं दिया आवेदन
दोनों आरोपियों की पेशी के दौरान ED की ओर से उनकी कस्टोडियल रिमांड बढ़ाने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया गया। मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद स्पेशल कोर्ट ने सतपाल सिंह छाबड़ा और उत्कर्ष चंद्राकर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे, जबकि मामले की जांच एजेंसी की ओर से आगे भी जारी रहेगी।
कैंडिडेट्स को पेपर उपलब्ध कराने का आरोप
CGPSC घोटाले की जांच के दौरान परीक्षा के पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर उम्मीदवारों से लाखों रुपये लेने की जानकारी सामने आई है। ED के वकील सौरभ पांडेय के मुताबिक, आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर की कथित भूमिका उम्मीदवारों तक CGPSC प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा के पेपर पहुंचाने की थी। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उम्मीदवारों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
महिला कैंडिडेट ने दर्ज कराया अहम बयान
ED की जांच में एक महिला कैंडिडेट का बयान भी दर्ज किया गया है। एडवोकेट सौरभ पांडेय के अनुसार, महिला ने बताया कि उसे प्रीलिम्स परीक्षा का पेपर परीक्षा से पहले उपलब्ध कराया गया था। उसका दावा है कि वास्तविक परीक्षा में पूछे गए 100 प्रतिशत सवाल पहले मिले पेपर से मैच हुए थे। इस बयान को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
मेन्स पेपर के लिए लिए गए करीब 70 लाख रुपये
जांच में यह भी सामने आया कि महिला कैंडिडेट से CGPSC मेन्स परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर करीब 70 लाख रुपये लिए गए। कथित तौर पर उसे मेन्स का पेपर दिखाकर उपलब्ध कराया गया था, लेकिन जब वास्तविक परीक्षा हुई तो वह पेपर परीक्षा में पूछे गए सवालों से मैच नहीं हुआ। ED के वकील के मुताबिक, जांच में ऐसे अन्य उम्मीदवारों से भी पैसे लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच के दायरे में कई लोग, भेजे गए समन
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ED ने कई ऐसे लोगों को समन जारी किए हैं, जिनका इस मामले से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ाव सामने आया है। हालांकि, जांच अभी जारी होने के कारण इन लोगों के नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। समन किए गए लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उनसे मामले से जुड़ी जानकारी हासिल की जाएगी।
सबूत मिलने पर मांगी जा सकती है कस्टडी
एडवोकेट सौरभ पांडेय के अनुसार, जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसा साक्ष्य मिलता है, जिससे हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी लगे, तो ED उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है। एजेंसी फिलहाल बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
60 दिन में जांच पूरी करने का लक्ष्य
जांच एजेंसी ने करीब 60 दिनों के भीतर जांच पूरी कर प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल करने का लक्ष्य रखा है। इस दौरान सामने आने वाले बयानों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और CGPSC पेपर कांड से जुड़े कथित लेनदेन तथा अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।
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