Misbah-ul-Haq: पाकिस्तान क्रिकेट में इन दिनों टीम और बोर्ड के स्तर पर लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और हाल ही में मुख्य चयनकर्ता का पद छोड़ने वाले मिस्बाह-उल-हक ने भारतीय क्रिकेट सिस्टम की तारीफ की है। उन्होंने पाकिस्तान में बार-बार खिलाड़ियों को बदलने की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी मजबूत क्रिकेट सिस्टम को तैयार करने में समय लगता है। उनके इस बयान को पाकिस्तान क्रिकेट की मौजूदा स्थिति पर सीधी टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है।
भारतीय क्रिकेट सिस्टम को लेकर क्या बोले मिस्बाह?
मिस्बाह-उल-हक ने भारतीय क्रिकेट के विकास की प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने अपने सिस्टम को बेहतर बनाने और विकसित करने में लंबा समय लगाया। उन्होंने बताया कि 1990 के दशक के बाद भारतीय क्रिकेट ने धीरे-धीरे अपने सिस्टम में निवेश किया और उसे मजबूत किया। मिस्बाह के मुताबिक, क्रिकेट में मजबूत व्यवस्था तैयार करने का कोई शॉर्टकट नहीं होता और इसके लिए लगातार मेहनत तथा धैर्य की जरूरत होती है।
बार-बार खिलाड़ियों को बदलने पर उठाए सवाल
पाकिस्तान क्रिकेट टीम में हालिया बदलावों को लेकर भी मिस्बाह ने अपनी चिंता जाहिर की। उनके मुताबिक, युवा खिलाड़ियों को लगातार सीमित ओवर क्रिकेट खेलने का मौका मिल रहा है, जबकि रेड-बॉल क्रिकेट का अनुभव अपेक्षाकृत कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों को चार दिवसीय क्रिकेट में पर्याप्त मौके नहीं मिल रहे हैं। इसका असर टेस्ट क्रिकेट में दबाव झेलने की उनकी क्षमता पर पड़ सकता है।
रेड-बॉल क्रिकेट से दूरी को बताया चिंता का विषय
मिस्बाह का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में सफल होने के लिए खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप की पर्याप्त तैयारी और अनुभव जरूरी है। सीमित ओवर क्रिकेट में खेलने की आदत के कारण युवा खिलाड़ियों को टेस्ट मैचों की कठिन परिस्थितियों के अनुकूल होने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि घरेलू स्तर पर चार दिवसीय क्रिकेट को मजबूत किए बिना पाकिस्तान मजबूत टेस्ट टीम तैयार नहीं कर सकता।
स्थानीय और विदेशी कोचों पर भी उठाई आवाज
मिस्बाह-उल-हक ने पाकिस्तान क्रिकेट में स्थानीय और विदेशी कोचों के साथ कथित तौर पर होने वाले अलग-अलग व्यवहार पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि स्थानीय कोचों को विदेशी कोचों की तुलना में ज्यादा जांच-पड़ताल और आलोचना का सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक विदेशी कोच रखने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन उनके प्रति अपेक्षाकृत नरम रवैया अपनाया जाना चिंता का विषय है।
पाकिस्तान टीम में सीरीज के बीच बड़े बदलाव
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के बीच टीम में बड़े बदलाव किए। सीरीज का दूसरा मुकाबला खत्म होने के बाद सात खिलाड़ियों को वापस पाकिस्तान भेज दिया गया। इनमें मोहम्मद रिजवान, इमाम-उल-हक, सलमान आगा, अली उस्मान, आमिर जमाल, ओवैस जफर और खुर्रम शहजाद शामिल थे। सीरीज का तीसरा और आखिरी टेस्ट अगले सप्ताह शुरू होना है।
बाबर आजम की गैरमौजूदगी में सलमान आगा ने संभाली कप्तानी
बाबर आजम चोट के कारण पहले टेस्ट में पाकिस्तान टीम का हिस्सा नहीं बन पाए थे। उनकी गैरमौजूदगी में सलमान आगा ने टीम की कप्तानी की थी। हालांकि, बाद में टीम में किए गए बड़े बदलावों के चलते उन्हें भी वापस भेजे जाने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया गया। इस फैसले ने पाकिस्तान क्रिकेट में चयन प्रक्रिया और टीम मैनेजमेंट को लेकर चर्चा और तेज कर दी।
मिस्बाह ने मुख्य चयनकर्ता पद से दिया इस्तीफा
मिस्बाह-उल-हक का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता का पद छोड़ दिया है। सीरीज के बीच PCB द्वारा किए गए बड़े बदलावों के बाद उनके पद छोड़ने की खबर सामने आई थी। इसके अलावा बोर्ड ने हेड कोच सरफराज खान को भी हटाकर माइक हेसन को यह जिम्मेदारी सौंप दी।
पाकिस्तान क्रिकेट के लिए सिस्टम सुधारने की चुनौती
मिस्बाह के बयान से स्पष्ट है कि पाकिस्तान क्रिकेट के सामने केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम को लेकर भी कई सवाल हैं। लगातार टीम में बदलाव, घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट की कमी और कोचिंग व्यवस्था को लेकर उठते सवाल पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में भारत के सिस्टम का उदाहरण देते हुए मिस्बाह ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान को भी दीर्घकालिक योजना बनाकर क्रिकेट ढांचे में लगातार निवेश करने की जरूरत है।
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