Delhi Building Collapse : दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के छात्र बहुल इलाके सत्या निकेतन में रविवार को एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में मलबे के नीचे दबने से पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि राहत और बचाव दल ने 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हादसे की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में पुलिस, दमकलकर्मी तथा बचाव दल मौके पर पहुंच गए।
दोपहर करीब 1:30 बजे मिली हादसे की सूचना
दिल्ली फायर सर्विस को रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे सत्या निकेतन में इमारत गिरने की जानकारी मिली। सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की टीमें, दिल्ली पुलिस और अन्य राहत-बचाव कर्मी तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। मलबे को हटाने के लिए अभियान शुरू किया गया और अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई। बचाव अभियान के दौरान 10 लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।
इमारत मालिक के खिलाफ FIR दर्ज
हादसे के मामले में दिल्ली पुलिस ने कथित इमारत मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इमारत के निर्माण, मरम्मत या रखरखाव में किन नियमों का उल्लंघन हुआ था। हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
MCD ने अवैध बहुमंजिला इमारतों पर कसा शिकंजा
सत्या निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। निगम ने चार मंजिल से अधिक ऊंची सभी अवैध इमारतों और ढांचों को तत्काल प्रभाव से सील करने के निर्देश जारी किए हैं। इस फैसले का उद्देश्य छात्र इलाकों में नियमों के विपरीत बने भवनों से उत्पन्न सुरक्षा जोखिम को कम करना है।
मेयर ने दोषियों पर कार्रवाई की कही बात
दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए घटना पर सख्त रुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी MCD अधिकारी की लापरवाही सामने आती है या अवैध निर्माण को संरक्षण देने की बात साबित होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मेयर ने दोषियों को किसी भी स्थिति में नहीं बख्शने की बात कही है।
छात्रों में हादसे को लेकर भारी आक्रोश
सत्या निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित होने के कारण छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय इलाका है। यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी PG और किराये के कमरों में रहते हैं। हादसे के बाद छात्रों और छात्र संगठनों में नाराजगी देखने को मिली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने सिविक सेंटर स्थित MCD मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और छात्रों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
MCD मुख्यालय में प्रदर्शन, सुरक्षा नियमों पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान ABVP कार्यकर्ता MCD परिसर के भीतर भी पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छात्र बहुल क्षेत्रों में PG और बहुमंजिला इमारतों के निर्माण से जुड़े सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना था कि प्रशासन को केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही अवैध निर्माण की पहचान कर उसे रोकना चाहिए।
सत्या निकेतन में हजारों छात्र करते हैं निवास
सत्या निकेतन के आसपास दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के कई प्रमुख कॉलेज स्थित हैं। इनमें एआरएसडी कॉलेज, वेंकटेश्वर कॉलेज और मोतीलाल नेहरू कॉलेज जैसे संस्थान शामिल हैं। इन कॉलेजों में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में छात्र सत्या निकेतन और आसपास के इलाकों में PG या किराये के मकानों में रहते हैं। छात्रों की लगातार बढ़ती आवासीय मांग के चलते यहां अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण का दबाव भी बढ़ा है।
अवैध निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं कि कुछ मकान मालिक भवन निर्माण नियमों और बिल्डिंग बायलॉज की अनदेखी कर अतिरिक्त मंजिलें तैयार कर देते हैं। संकरी गलियों, पुराने ढांचों और लगातार होने वाले मरम्मत या निर्माण कार्यों के बीच सुरक्षा जोखिम और बढ़ जाता है। अब सत्या निकेतन हादसे के बाद प्रशासन की निगरानी और समय पर कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
हादसे के बाद प्रशासन की अगली चुनौती
सत्या निकेतन हादसे ने राजधानी में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा की व्यवस्था पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अवैध इमारतें लंबे समय से मौजूद थीं, तो समय रहते उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। MCD के नए आदेश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अवैध बहुमंजिला इमारतों को सील करने की कार्रवाई कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू होती है।
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