Delhi Building Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने की दर्दनाक घटना में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इस हादसे के बाद जहां इलाके में मातम का माहौल है, वहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली और राजधानी में चल रहे कथित अवैध निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने घटनास्थल पर पहुंचकर भवन सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी और छात्रों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
दीपेंद्र हुड्डा ने प्रशासन से मांगे जवाब
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने मौके पर पहुंचकर हादसे को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घटना के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मलबे में कितने छात्र फंसे हो सकते हैं। उन्होंने सवाल किया कि इलाके में संचालित पीजी का निर्माण और संचालन किन नियमों के तहत हो रहा था और इन भवनों के नक्शे किस स्तर पर मंजूर किए गए।
फायर सेफ्टी और भवन मंजूरी पर सवाल
दीपेंद्र हुड्डा ने यह भी सवाल उठाया कि कथित अवैध पीजी को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और अन्य जरूरी मंजूरियां कैसे मिलीं। उन्होंने पूछा कि यदि इमारतों में सुरक्षा मानकों की जांच हुई थी तो ऐसी घटना कैसे सामने आई। कांग्रेस नेता ने मांग की कि भवन निर्माण, नक्शे और अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों की मंजूरी देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
लगातार हादसों को लेकर सरकार पर निशाना
हुड्डा ने दावा किया कि पिछले तीन-चार वर्षों में दिल्ली में इस तरह के कई गंभीर हादसे सामने आए हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया प्रभावी नहीं रही। उन्होंने कहा कि छात्रों के अधिकार और सुरक्षा से जुड़े मामलों में NSUI और कांग्रेस कार्यकर्ता उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। उनके मुताबिक, हादसे के बाद केवल राहत और बचाव ही नहीं, बल्कि इसके पीछे की प्रशासनिक जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
श्रीनिवास बीवी ने रेस्क्यू में देरी का आरोप लगाया
कांग्रेस के युवा नेता श्रीनिवास बीवी ने भी प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रशासनिक तंत्र को घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति संभालने में करीब दो घंटे लग गए, जिससे बचाव अभियान प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों और निर्धारित मानकों की अनदेखी कर खतरनाक इमारतों को मंजूरी दी जा रही है।
भ्रष्टाचार के आरोपों से गरमाई सियासत
श्रीनिवास बीवी ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और कमीशन के कारण सुरक्षा मानकों से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और कैंपस के आसपास छात्रों के लिए सुरक्षित एवं व्यवस्थित हॉस्टल की व्यवस्था होनी चाहिए थी। उनके अनुसार, छात्रों को असुरक्षित पीजी में रहने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए और सरकार को उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
पुलिस ने बताया कैसे शुरू हुआ रेस्क्यू
दक्षिण-पश्चिम जिले के एडिशनल डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल के मुताबिक, पुलिस को दोपहर करीब 1:30 बजे PCR कॉल के जरिए इमारत गिरने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही साउथ कैंपस थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कुछ छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद मलबे में अन्य लोगों के दबे होने की जानकारी सामने आई।
NDRF की अगुवाई में राहत-बचाव अभियान जारी
मलबे में लोगों के फंसे होने की पुष्टि के बाद NDRF, CATS एंबुलेंस और अन्य राहत टीमों को घटनास्थल पर बुलाया गया। फिलहाल NDRF की अगुवाई में भारी मलबा हटाने और संभावित रूप से फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान जारी है। हादसे के बाद अब प्रशासन के सामने राहत-बचाव के साथ-साथ भवन सुरक्षा और कथित अवैध निर्माण की जांच की बड़ी चुनौती भी है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई की मांग तेज
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में पीजी और किराये की इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है। राजनीतिक दलों ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि संबंधित भवन को किस स्तर पर मंजूरी मिली और सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं सुनिश्चित किया गया। अब हादसे की जांच और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही कई सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।
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