CG Teacher News : छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, जिला सरगुजा के प्रतिनिधियों ने सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, पदोन्नति में समान अवसर और वरिष्ठता संरक्षण को लेकर शासन के नाम ज्ञापन सौंपा। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने सरगुजा जिले के तीनों विधायकों के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री तक अपनी मांगें पहुंचाईं। प्रतिनिधियों ने शासन से शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द सार्थक पहल करने का आग्रह किया।
अचानक TET अनिवार्यता खत्म करने की मांग
फेडरेशन ने पूर्व से नियुक्त और सेवारत शिक्षकों पर अचानक TET की अनिवार्यता लागू किए जाने का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को पर्याप्त अवसर दिए बिना केवल नॉन-TET होने के आधार पर पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षकों ने मांग की है कि उन्हें TET पास करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं और तब तक पदोन्नति के अधिकार प्रभावित न किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
फेडरेशन के जिलाध्यक्ष संदीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि पूर्व से नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त रखना न्यायसंगत होगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षकों को TET पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक की समयावधि दी गई है। उनके अनुसार, पूर्व सेवारत शिक्षकों को तत्काल पदोन्नति से रोकने के बजाय निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा पास करने का अवसर मिलना चाहिए।
केंद्र को प्रस्ताव भेजने की अपील
संदीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को पूर्व नियुक्त सेवारत शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के हितों की सुरक्षा के लिए शासन को सकारात्मक और व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है। फेडरेशन ने इस संबंध में तमिलनाडु सरकार द्वारा अपने राज्य के शिक्षकों के लिए उठाए गए कदम का भी उदाहरण दिया।
पदोन्नति से वंचित करने पर उठाए सवाल
फेडरेशन का कहना है कि 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद राज्य में शिक्षकों को TET परीक्षा के लिए अभी तक केवल एक अवसर मिला है। ऐसी स्थिति में 31 अगस्त 2028 से पहले केवल TET पास नहीं होने के आधार पर शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित करना उचित नहीं होगा। संगठन ने दावा किया कि इससे शिक्षकों के समान अवसर और अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
अनुच्छेद 14 और 16 का भी उल्लेख
जिलाध्यक्ष ने कहा कि पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए बिना नॉन-TET शिक्षकों को पदोन्नति प्रक्रिया से बाहर करना संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 के प्रावधानों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने शासन से मांग की कि सेवारत शिक्षकों की वरिष्ठता और पदोन्नति के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ अन्याय न हो।
CGBSE से विशेष TET कराने की मांग
फेडरेशन ने यह भी कहा कि यदि TET परीक्षा आयोजित करना बेहद आवश्यक माना जाता है, तो छत्तीसगढ़ में विशेष TET परीक्षा का आयोजन कराया जाना चाहिए। संगठन ने सुझाव दिया कि जिस तरह केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी CTET का आयोजन CBSE द्वारा किया जाता है, उसी तरह राज्य में TET परीक्षा छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल यानी CGBSE के माध्यम से कराई जा सकती है।
ज्ञापन कार्यक्रम में शिक्षक रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष संदीप कुमार पाण्डेय, कार्यकारी जिलाध्यक्ष मुकेश सिन्हा, प्रांतीय संगठन मंत्री धनंजय सिंह, प्रांतीय सलाहकार संतोष यादव, सीतापुर विकासखंड अध्यक्ष राजूराम खलखो, बतौली ब्लॉक अध्यक्ष श्रवण पैंकरा और लुण्ड्रा ब्लॉक अध्यक्ष शिवचरण नागेश सहित कई शिक्षक मौजूद रहे। कार्यक्रम में जगमोहन सरोटिया, विकास भगत, सचिन महतो, ऋषिकेश तिवारी, विजय यादव, शारदाकांत त्रिवेदी, राजकुमार तिर्की, मोहर साय भारद्वाज, रजत खेस, रामनारायण यादव, अभिषेक तिवारी, विजय पोर्ते और बिहारी राम पैंकरा समेत अन्य शिक्षकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
शासन से जल्द समाधान की उम्मीद
फेडरेशन ने उम्मीद जताई कि शासन शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़ी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगा। संगठन का कहना है कि सेवारत शिक्षकों को पर्याप्त अवसर दिए बिना उनकी पदोन्नति रोकना उचित नहीं है। प्रतिनिधियों ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर शिक्षकों के हितों की रक्षा करने और स्पष्ट समाधान निकालने की मांग की है।
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