Arunachal Pradesh Earthquake : अरुणाचल प्रदेश के बिचोम और इसके आसपास के क्षेत्रों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.9 मापी गई। कम तीव्रता के इस भूकंप के कारण फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान या संपत्ति को क्षति पहुंचने की सूचना नहीं है। स्थानीय स्तर पर स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने दी भूकंप की जानकारी
NCS के मुताबिक, भूकंप का केंद्र अरुणाचल प्रदेश के बिचोम क्षेत्र में दर्ज किया गया। इसकी तीव्रता 2.9 थी, जिसे बेहद कम या माइक्रो श्रेणी का भूकंप माना जाता है। इस स्तर के झटकों से आमतौर पर बड़े नुकसान की आशंका नहीं होती। हालांकि, भूकंप की किसी भी घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए रखती हैं।
भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील है पूर्वोत्तर भारत
अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर भारत का बड़ा हिस्सा भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण समय-समय पर छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं। अरुणाचल प्रदेश को उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र में रखा जाता है, इसलिए यहां कम तीव्रता के झटके भी भूगर्भीय गतिविधियों का हिस्सा हो सकते हैं।
भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की हलचल है प्रमुख वजह
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार होने वाली टेक्टोनिक हलचल हिमालयी क्षेत्र में भूकंप आने की प्रमुख वजहों में से एक है। दोनों प्लेटों के बीच दबाव बनने और उसके धीरे-धीरे रिलीज होने से धरती की सतह के नीचे कंपन उत्पन्न हो सकता है। इसी कारण हिमालय और पूर्वोत्तर भारत में नियमित अंतराल पर भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जाती हैं।
अरुणाचल के अन्य जिलों में भी दर्ज हो चुके हैं झटके
अरुणाचल प्रदेश में इससे पहले भी अलग-अलग क्षेत्रों में भूकंप दर्ज किए गए हैं। ऊपरी सियांग और कुरुंग कुमे जैसे जिलों में भी अलग-अलग तीव्रता के झटके महसूस किए जा चुके हैं। इनकी तीव्रता करीब 2.9 से लेकर 5.1 तक दर्ज की गई है। हालांकि इनमें से कई घटनाएं कम तीव्रता की रही हैं, लेकिन लगातार दर्ज होने वाली ऐसी गतिविधियां क्षेत्र की भूगर्भीय संवेदनशीलता को दर्शाती हैं।
2.9 तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक होता है?
भूकंप विज्ञान के अनुसार, 3.0 से कम तीव्रता वाले भूकंपों को सामान्य तौर पर बेहद हल्की या माइक्रो श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे भूकंप कई बार केवल सिस्मोग्राफ पर ही दर्ज होते हैं। यदि इन्हें महसूस किया भी जाए, तो आमतौर पर झटके बहुत हल्के होते हैं। इस स्तर के भूकंप से इमारतों, सड़कों या अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की संभावना बेहद कम रहती है।
भूकंप के लिहाज से सावधानी फिर भी जरूरी
कम तीव्रता के झटके नुकसान न पहुंचाएं, फिर भी भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में निर्माण के दौरान भूकंपरोधी तकनीकों और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना महत्वपूर्ण है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां भी समय-समय पर लोगों को आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने की सलाह देती हैं।
तेज झटके आएं तो अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
अगर कभी भूकंप के तेज झटके महसूस हों तो घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान तलाशना चाहिए। घर के अंदर होने पर मजबूत मेज या टेबल के नीचे शरण लेना और खिड़कियों, कांच तथा भारी सामान से दूरी बनाए रखना सुरक्षित विकल्प हो सकता है। बाहर होने पर इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर खुले स्थान पर जाना चाहिए। घर में टॉर्च, जरूरी दवाइयां और सूखा राशन जैसी आवश्यक वस्तुएं तैयार रखना भी आपदा की स्थिति में मददगार हो सकता है।
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