Bhaum Pradosh Vrat : हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और परेशानियों से मुक्ति मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है। जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस वर्ष 8 सितंबर, मंगलवार को भौम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है।
मंगलवार को पड़ने से खास बन जाता है भौम प्रदोष
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है। ‘भौम’ शब्द मंगल ग्रह से जुड़ा हुआ माना जाता है। भक्त इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ व्रत रखते हैं और दिनभर शिव नाम का स्मरण करते हैं। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से नकारात्मकता कम होती है तथा व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
8 सितंबर को त्रयोदशी तिथि कब शुरू होगी?
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि 8 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। उदया तिथि के नियम के अनुसार 8 सितंबर को ही प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा की तैयारी कर सकते हैं और प्रदोष काल में विशेष आराधना कर सकते हैं।
प्रदोष काल में शिव पूजा का शुभ समय
प्रदोष व्रत में प्रदोष काल को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। 8 सितंबर को प्रदोष काल शाम 6 बजकर 35 मिनट से रात 8 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इसी अवधि में शिवलिंग का अभिषेक, मंत्र जाप और आरती कर सकते हैं।
सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें
भौम प्रदोष व्रत रखने वाले भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान शिव का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करने के बाद वहां भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें। इसके बाद पूजा की आवश्यक सामग्री तैयार करके विधिवत आराधना शुरू की जा सकती है।
शिवलिंग का जल और पंचामृत से करें अभिषेक
पूजा के दौरान सबसे पहले शिवलिंग का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करने की परंपरा है। इसके बाद भगवान शिव को चंदन अर्पित करें। बेलपत्र, फूल और धतूरा चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव को शक्कर और घी से बनी मिठाई का भोग लगा सकते हैं। इसके बाद शिव मंत्रों का जाप और शिव चालीसा का पाठ करें।
कथा और आरती के बाद करें भगवान शिव का स्मरण
पूजा के अंत में प्रदोष व्रत की कथा पढ़ना या सुनना शुभ माना जाता है। इसके बाद घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर भगवान शिव का स्मरण करते रहें। शाम को दोबारा स्नान करके प्रदोष काल में शिव पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
भौम प्रदोष पर पूजा से मिलती है शिव कृपा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत सच्ची श्रद्धा और नियम के साथ रखने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। भगवान शिव की आराधना से नकारात्मक विचार दूर होने, आत्मविश्वास बढ़ने और मानसिक शांति मिलने की मान्यता है। हालांकि, पूजा-व्रत से जुड़े नियम और मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं, इसलिए श्रद्धालु अपने क्षेत्र के पंचांग का भी ध्यान रखें।
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